इजरायल के प्रसिद्ध पत्रकार गेडिउन लेवी, जो हारेट्ज़ अखबार में स्तंभ लिखते हैं, गज़ा संकट पर ऐसी बातें कहते हैं जो इजरायली समाज को आईना दिखाती हैं। लेवी स्पष्ट कहते हैं – "इजरायल और फिलिस्तीन के बीच कोई संघर्ष नहीं है। यह इजरायल का एकतरफा कब्जा है, जो खत्म होना चाहिए।"** उनकी नजर में गज़ा दुनिया की सबसे बड़ी खुली जेल है, जहां 20 लाख लोग कैद हैं।
गज़ा संकट क्यों बार-बार लौटता है? लेवी बताते हैं कि 2005 में इजरायल ने गज़ा से कथित वापसी की, लेकिन हवाई, समुद्री और जमीनी नाकाबंदी जारी रखी। लोग न आ सकते हैं, न जा सकते हैं। बिजली, पानी, दवा – सब पर इजरायल का नियंत्रण। यह संकट इसलिए दोहराता है क्योंकि मूल समस्या – कब्जा – हल नहीं हुई। हर कुछ सालों में हिंसा भड़कती है, क्योंकि दमन की नीति चल रही है।
गज़ा: "कम खर्च में ताकत का प्रदर्शन"? लेवी के अनुसार, इजरायल के लिए गज़ा एक आसान लक्ष्य है। सैन्य अभियान चलाकर वह अपनी शक्ति दिखाता है – कम जोखिम, ज्यादा फायदा। फिलिस्तीनी प्रतिरोध को कुचलना और घरेलू राजनीति में लोकप्रियता हासिल करना। लेकिन यह रक्षा नहीं, सामूहिक सजा है। हजारों नागरिक मारे जाते हैं, घर तबाह होते हैं – सिर्फ इसलिए कि कब्जे को चुनौती दी गई।
इजरायली समाज का "इनकार का संकट" सबसे दुखद है इजरायली समाज का इनकार। लेवी कहते हैं, अधिकांश इजरायली कभी फिलिस्तीनियों से नहीं मिले। वे कब्जे की हकीकत नहीं देखते। गज़ा में भुखमरी, विस्थापन और मौतें बढ़ रही हैं, लेकिन लोग इसे अपनी नीतियों का नतीजा नहीं मानते। मीडिया चुप रहता है, समाज अंधा बना रहता है। लेवी इसे "नैतिक अंधापन" कहते हैं – एक ऐसा समाज जो अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेर लेता है। गज़ा इजरायल की राजनीतिक और नैतिक हालत का साफ आईना है, लेकिन कोई देखना नहीं चाहता।
लेवी की आवाज इजरायल में कम सुनी जाती है, लेकिन वह सच्चाई की आवाज है। उनका मानना है कि असली शांति तभी आएगी जब कब्जा खत्म होगा, नाकाबंदी हटेगी और समान अधिकार मिलेंगे। क्या दुनिया और इजरायली समाज कभी यह सच स्वीकार करेगा?
सज्जाद अली नायाणी✍🏼