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Sunday, 14 December 2025

यूरोपीय संघ में भगदड़: क्या फ्रांस भी Brexit की राह पर?

यूरोपीय संघ में भगदड़: क्या फ्रांस भी Brexit की राह पर?
फ्रांस में किसानों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। दक्षिणी फ्रांस में संक्रामक नोडुलर डर्मेटाइटिस (लंपी स्किन डिजीज) नामक पशु रोग के प्रसार को रोकने के लिए सरकार की अनिवार्य कुलिंग नीति ने किसानों को सड़कों पर उतार दिया है। दिसंबर 2025 में पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को हटाया और सैकड़ों गायों को मार डाला, जिससे विरोध और भड़क उठा। किसान राजमार्ग ब्लॉक कर रहे हैं, घास की गांठें जला रहे हैं और सरकारी इमारतों पर गोबर फेंक रहे हैं। उनका कहना है कि यह नीति उनकी आजीविका को तबाह कर रही है। 

यह अशांति ठीक उसी समय हो रही है जब यूरोपीय संघ मर्कोसुर (ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे, पैराग्वे) के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर अंतिम मतदान की तैयारी कर रहा है। फ्रांसीसी किसान इस समझौते को अपनी कृषि के लिए मौत की घंटी मानते हैं। उनका तर्क है कि दक्षिण अमेरिकी उत्पाद सस्ते हैं क्योंकि वहां पर्यावरण और श्रम मानक कम सख्त हैं, जिससे यूरोपीय बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा होगी। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट कहा है कि वर्तमान रूप में यह समझौता फ्रांस स्वीकार नहीं करेगा और इसे ब्लॉक करने की कोशिश कर रहा है।

 फ्रांसीसी संसद ने भी सर्वसम्मति से समझौते का विरोध किया है। किसान यूनियनों ने ब्रुसेल्स तक ट्रैक्टर मार्च की धमकी दी है। 2024-25 में किसानों के व्यापक प्रदर्शनों की याद ताजा करते हुए, ये विरोध यूरोपीय संघ की नीतियों पर फ्रांस की बढ़ती नाराजगी को उजागर कर रहे हैं। ब्रुसेल्स से थोपे गए फैसले, कृषि सब्सिडी में कटौती की आशंका और आयातित उत्पादों से खतरा—ये सब मिलकर जनमत में सवाल उठा रहे हैं: क्या फ्रांस और EU के बीच की खाई अब भरना असंभव हो गई है?

 हालांकि मैक्रों EU के समर्थक हैं और Frexit की बात दूर की कौड़ी लगती है, लेकिन किसानों का गुस्सा और राजनीतिक अस्थिरता भविष्य में बड़े बदलाव ला सकती है। अगर मर्कोसुर समझौता आगे बढ़ा तो फ्रांस में EU-विरोधी भावनाएं और मजबूत हो सकती हैं। क्या यह Brexit जैसी भगदड़ की शुरुआत है? फिलहाल तो फ्रांस के खेतों से उठ रही चीखें ब्रुसेल्स तक गूंज रही हैं।
सज्जाद अली नायाणी ✍