इजरायली अखबार हाआरेत्ज़ ने अपनी हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि गाज़ा के भविष्य में शामिल होने की इच्छुक सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की क्षेत्रीय गतिविधियां बेहद विनाशकारी साबित हो सकती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (जो गाज़ा में फिलिस्तीनी पुलिस की सहायता करेगा) पर चर्चा के बीच, हाआरेत्ज़ ने यमन और सूडान में इन दोनों देशों की भूमिका का विश्लेषण किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, UAE और सऊदी अरब अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं तथा उनके नेता ट्रंप के निजी मित्र और व्यापारिक साझेदार हैं। लेकिन यमन व सूडान में उनकी सक्रियता ने लाखों लोगों की जान ली और करोड़ों को विस्थापित किया। हाआरेत्ज़ लिखता है कि गाज़ा में इन देशों पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ये दोनों देश अभी भी यमन और सूडान में अपने स्थानीय संघर्ष सुलझा नहीं पाए हैं।
विशेष रूप से UAE की आलोचना करते हुए रिपोर्ट में कोलंबियाई भाड़े के सैनिकों (मर्सेनरीज़) का जिक्र है। जांच रिपोर्टों के हवाले से कहा गया है कि UAE ने यमन के बाद सूडान में भी कोलंबियाई सैनिकों की भर्ती की, जो रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के साथ लड़ रहे हैं। इन सैनिकों को महीने में 2600 से 6000 डॉलर तक वेतन दिया जाता है। वे पहले सोमालिया या UAE में ट्रेनिंग लेते हैं, फिर सूडान भेजे जाते हैं। ब्रिटिश अखबार गार्डियन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए हाआरेत्ज़ ने बताया कि ये मर्सेनरीज़ न केवल लड़ाई में हिस्सा लेते हैं, बल्कि हजारों बच्चों और किशोरों की भर्ती व ट्रेनिंग भी करते हैं।
UAE इन आरोपों का खंडन करता है, लेकिन उपलब्ध सबूत—जैसे अमेरिकी प्रतिबंध, यूएन विशेषज्ञों की रिपोर्टें और जब्त पासपोर्ट—इसकी ओर इशारा करते हैं। हाआरेत्ज़ का कहना है कि गाज़ा में अंतरराष्ट्रीय बलों के लिए UAE जैसे देशों पर निर्भरता जोखिम भरी है, क्योंकि उनकी प्रॉक्सी युद्ध नीति ने यमन व सूडान में सबसे भयावह मानवीय संकट पैदा किए हैं।
यह रिपोर्ट मध्य पूर्व में अमेरिकी-इजरायली लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में UAE की भूमिका पर सवाल उठाती है और चेताती है कि बिना सावधानी के ऐसे सहयोगी गाज़ा को नए संकट में धकेल सकते हैं।
सज्जाद अली नायाणी ✍