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Wednesday, 10 December 2025

शादी.com : भारत की सबसे बड़ी मैट्रिमोनियल साइट या सबसे बड़ा ऑनलाइन लूट-पोर्टल?

शादी.com : भारत की सबसे बड़ी मैट्रिमोनियल साइट या सबसे बड़ा ऑनलाइन लूट-पोर्टल? 
करोड़ों भारतीयों की शादी की उम्मीद को चूस रहा ‘ऑटो-डेबिट’ और फेक प्रोफाइल का जाल भारत में जब बात शादी की आती है तो सबसे पहला नाम आता है Shaadi.com का।
 25 साल पुरानी इस वेबसाइट के दावे हैं कि उसने लाखों शादियाँ करवाईं। लेकिन हकीकत यह है कि आज लाखों-करोड़ों भारतीय इसे “सबसे बड़ा ऑनलाइन फ्रॉड” मान रहे हैं। हर महीने करीब 8-10 लाख नई मेंबरशिप बिकती हैं। 

अगर औसत प्लान भी ₹1500 का मानें तो हर महीने 120-150 करोड़ रुपए सीधे कंपनी के खाते में पहुँच रहे हैं – बिना कोई वास्तविक सर्विस दिए। 

 कैसे होता है खेल? 1. आप एक बार मेंबरशिप लेते हैं। उसके बाद हर 3-6 महीने में आपके कार्ड/यूपीआई से अपने आप पैसा कटने लगता है – बिना आपकी OTP, बिना आपकी सहमति। शिकायत करने जाते हैं तो पुराने कस्टमर केयर नंबर बंद। नया नंबर मिलता है तो वहाँ ऑटोमेटेड IVR घुमाता रहता है। 

2. 90% से ज्यादा प्रोफाइल फेक आप किसी लड़की की प्रोफाइल को रिक्वेस्ट भेजते हैं – तुरंत एक्सेप्ट हो जाता है। बड़ा खुश होते हैं। पैसा देकर नंबर लेते हैं। फोन करते हैं तो जवाब मिलता है

 – “सॉरी, मुझे याद नहीं मैंने एक्सेप्ट किया था”, “मुझे लोकल लड़का चाहिए था”, “मैं तो 2 साल पहले अकाउंट डिलीट कर चुकी हूँ”। 

असल में वो सारी प्रोफाइल्स शादी.com के अपने कर्मचारी या थर्ड-पार्टी वेंडर चलाते हैं। एक व्यक्ति 10-15 फेक अकाउंट एक साथ ऑपरेट करता है

 – सिर्फ आपको मेंबरशिप रिन्यू करवाने के लिए। 

3. रिफंड नामुमकिन कंपनी की पॉलिसी में लिखा है

 – “एक बार पेमेंट हो गया तो रिफंड नहीं होगा”

। बैंक में चार्जबैक डालो तो शादी.com झूठे सबूत दे देती है कि “यूजर ने खुद एक्सेप्ट बटन दबाया था”। बैंक हाथ खड़े कर लेता है। 

 आँकड़े डराने वाले हैं 

- 2023-2025 के बीच Consumer Complaints पोर्टल पर शादी.com के खिलाफ 18,000+ शिकायतें दर्ज। 

- Trustpilot पर रेटिंग मात्र 1.3/5। 

- हर महीने 1 करोड़ से ज्यादा लोग साइट विज़िट करते हैं, जिनमें से 8-10 लाख पैसे देकर मेंबर बनते हैं। 

- कुल अनुमानित सालाना टर्नओवर : 1500-1800 करोड़ रुपए (सिर्फ मेंबरशिप से)। 

 कानून कहाँ है? IT Act 2000 की धारा 66D (चीटिंग बाय पर्सोनेशन) और Consumer Protection Act 2019 के तहत यह साफ-साफ फ्रॉड है। 

फिर भी कंपनी खुलेआम चल रही है क्योंकि: - ज्यादातर पीड़ित ₹2000-5000 के लिए कोर्ट-कचहरी नहीं करते।

 - पुलिस साइबर सेल में शिकायत डालते हैं तो FIR तक नहीं होती।

 - कंपनी का हेडऑफिस मुंबई में है, लेकिन सर्वर विदेश में – कानूनी पेंच।

 अब समय है एक्शन का

 1. सरकार को तुरंत शादी.com सहित सभी बड़ी मैट्रिमोनियल साइट्स की ऑडिट करवाए।

 2. फेक प्रोफाइल बनाने वालों और ऑटो-डेबिट करने वालों पर IPC 420 के तहत केस दर्ज हो।

 3. सभी पीड़ितों का पैसा 30 दिन के अंदर रिफंड किया जाए।

 4. मेंबरशिप लेने से पहले Aadhaar + वीडियो वेरिफिकेशन अनिवार्य हो। 

शादी जैसा पवित्र रिश्ता अब ऑनलाइन लूट का धंधा बन गया है। अगर आज हम चुप रहे तो कल हमारा या हमारे बच्चों का नंबर भी आएगा। 

आप भी शादी.com से ठगे गए हैं? 

अपनी कहानी नीचे कमेंट करें। साथ मिलकर इस लुटेरी वेबसाइट को बंद करवाएँ। 

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