अहमदाबाद: गुजरात कैडर की 2008 बैच की आईपीएस अधिकारी **सारा अफजल अहमद रिजवी** का अंतर-राज्य डेप्युटेशन केंद्र सरकार ने दो साल के लिए बढ़ा दिया है। सारा रिजवी, जो गुजरात की पहली मुस्लिम महिला आईपीएस अधिकारी के रूप में जानी जाती हैं, फिलहाल जम्मू-काश्मीर पुलिस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं। इस एक्सटेंशन से वे अक्टूबर 2025 के बाद भी जम्मू-काश्मीर में अपनी सेवाएं देती रहेंगी।
सारा रिजवी मुंबई में जन्मी और पली-बढ़ी हैं। वे कॉमर्स ग्रेजुएट हैं और शुरू में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहती थीं। लेकिन डॉ. के.एम. आरिफ के एक व्याख्यान से प्रभावित होकर यूपीएससी परीक्षा देने का फैसला किया। उर्दू माध्यम से तैयारी की और मात्र दो प्रयासों में सिविल सर्विसेज में सफलता हासिल की। इस उपलब्धि ने उन्हें गुजरात की पहली मुस्लिम महिला आईपीएस का दर्जा दिलाया।
गुजरात में उनकी पहली पोस्टिंग जामनगर में हुई, इसके बाद राजकोट जिले के गोंडल में एएसपी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उस समय गोंडल गैंग वॉर के लिए कुख्यात था, फिर भी उन्होंने सफलतापूर्वक ड्यूटी निभाई। अक्टूबर 2022 में व्यक्तिगत कारणों से जम्मू-काश्मीर में अंतर-कैडर डेप्युटेशन पर भेजा गया। यहां उन्होंने उधमपुर-रियासी रेंज की डीआईजी, डीआईजी जम्मू (आईआर) और डीआईजी एडमिनिस्ट्रेशन जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले हैं।
सारा रिजवी का परिवार भी शिक्षित है। पिता अफजल अहमद साइंस ग्रेजुएट हैं, मां निगार रिजवी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा हैं। भाई सिविल इंजीनियर और बहन कंप्यूटर ग्रेजुएट हैं। 2008 में उन्होंने आरपीएफ अधिकारी मुन्नावर खान से शादी की।
एक इंटरव्यू में सारा रिजवी ने कहा था कि उन्हें पुलिस का काम बहुत पसंद है और वे कभी थकती नहीं हैं। महिला अधिकारी के रूप में वे पुलिस के प्रति लोगों की धारणा बदलना चाहती हैं। उनकी यह यात्रा युवा महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, खासकर मुस्लिम समाज की लड़कियों के लिए।
सज्जाद अली नायाणी ✍