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Friday, 9 January 2026

ट्रंप का नया दावा: "मैंने 8 युद्ध रुकवाए, भारत-पाकिस्तान में 8 जेट गिर चुके थे... मुझे ही मिलना चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार!"

ट्रंप का नया दावा: "मैंने 8 युद्ध रुकवाए, भारत-पाकिस्तान में 8 जेट गिर चुके थे... मुझे ही मिलना चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार!"
Friday World January 10,2026 
               शांति का राजा सिर्फ़ ट्रंप!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर खुद को वैश्विक शांति का सबसे बड़ा रक्षक बताते हुए नोबेल शांति पुरस्कार का दावा पेश किया है। 9 जनवरी 2026 को व्हाइट हाउस में तेल और गैस उद्योग के नेताओं से बातचीत के दौरान और फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले कुछ महीनों में ही 8 बड़े युद्ध खत्म कर दिए हैं। 

इनमें से कुछ युद्ध दशकों से चल रहे थे, जबकि कुछ तो बस शुरू होने वाले थे। 

ट्रंप ने खास तौर पर भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 के संकट का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया, “भारत और पाकिस्तान जहां पहले ही 8 जेट हवा में मार गिराए जा चुके थे...

 दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश बड़े युद्ध के लिए तैयार थे। मैंने इसे बहुत तेजी से, बिना परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के शांत करवा दिया।”

 ट्रंप ने आगे कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिका आए और उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच एक करोड़ (10 मिलियन) लोगों की जान बचाई, क्योंकि अगर युद्ध होता तो वह बेहद भयानक होता।” 

ट्रंप का नोबेल पुरस्कार पर जोरदार दावा ट्रंप ने खुद को इतिहास का सबसे बड़ा शांति दूत करार देते हुए कहा, “इतिहास में मुझे कोई ऐसा नहीं दिखता जिसे नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए, मेरे अलावा। किसी और ने इतने युद्ध नहीं रोके। सैद्धांतिक रूप से हर युद्ध रोकने के लिए एक-एक नोबेल मिलना चाहिए। लेकिन मुझे पुरस्कार की परवाह नहीं, मुझे जान बचाने की परवाह है। मैंने करोड़ों-करोड़ों जिंदगियां बचाई हैं।”

 ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बाराक ओबामा पर भी निशाना साधा, जिन्हें 2009 में कार्यकाल शुरू होते ही नोबेल मिला था। ट्रंप बोले, “ओबामा को पुरस्कार मिला लेकिन उन्होंने कुछ किया ही नहीं। मुझे पता नहीं क्यों मिला।” 

वेनेजुएला और फिलिस्तीन पर ट्रंप का दोहरा रुख ट्रंप के इस दावे के बीच कई आलोचक उनकी विदेश नीति पर सवाल उठा रहे हैं। वेनेजुएला में 2025 में विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार मिला, जिन्होंने इसे आंशिक रूप से ट्रंप को समर्पित किया क्योंकि अमेरिका ने मादुरो शासन के खिलाफ कदम उठाए। ट्रंप ने कहा कि मचाडो जल्द वाशिंगटन आएंगी और वह उनसे मिलेंगे। 

लेकिन दूसरी तरफ, कई विश्लेषक ट्रंप की इजराइल नीति की आलोचना करते हैं। गाजा और फिलिस्तीन में इजराइल के सैन्य अभियानों को अमेरिकी समर्थन देने के कारण हजारों निर्दोष फिलिस्तीनियों की मौत हुई। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप की “दादागिरी” और तेल हितों से जुड़ी नीतियां शांति के बजाय संघर्ष को बढ़ावा देती हैं। वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर अमेरिकी दबाव और इजराइल के जरिए मध्य पूर्व में हस्तक्षेप को लेकर ट्रंप पर “तानाशाही” और “खूनरेजी” के समर्थन का आरोप लगता रहा है। ऐसे में नोबेल जैसा शांति पुरस्कार उनके लिए कितना उपयुक्त है, यह सवाल गहरा है। 

 ट्रंप के ये दावे अब तक 70 से ज्यादा बार दोहराए जा चुके हैं, लेकिन हकीकत में कई संघर्षों का विवरण अतिरंजित लगता है। फिर भी, ट्रंप अपनी “शांति कूटनीति” को लेकर आश्वस्त हैं और 2026 के नोबेल के लिए पाकिस्तान से नामांकन भी मिल चुका है।

 ट्रंप की यह शैली वैश्विक राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है—क्या यह सच्ची उपलब्धि है या महज चुनावी/व्यक्तिगत प्रचार? समय बताएगा। लेकिन फिलहाल, ट्रंप का संदेश साफ है: 
शांति का राजा सिर्फ़ ट्रंप!

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World January 10,2026