Friday World January 3,2026
तेहरान/वाशिंगटन, 3 जनवरी 2026: मध्य पूर्व में तनाव का नया केंद्र बन चुका ईरान अब एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति **डोनाल्ड ट्रंप** ने ईरान में जारी आर्थिक संकट से उपजे विरोध प्रदर्शनों पर सख्त चेतावनी जारी की है, जबकि ईरान की सरकार ने इसे "आंतरिक मामलों में घोर दखल" और "हिंसा व आतंकवाद को उकसाने" वाला कदम करार दिया है। यह घटनाक्रम 2026 की शुरुआत में दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव को और गहरा कर रहा है, खासकर जून 2025 में अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरानी परमाणु साइटों पर हमलों के बाद।
ट्रंप ने शुक्रवार को अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा, "अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है और उन्हें बेरहमी से मारता है, जो कि उनकी आदत है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। हम पूरी तरह लॉक और लोडेड हैं और तैयार हैं।" यह बयान ईरान में जारी प्रदर्शनों के छठे दिन आया, जब हिंसा में कई मौतें हो चुकी थीं। ट्रंप का यह संदेश प्रदर्शनकारियों के लिए "समर्थन" का प्रतीक बन गया, लेकिन तेहरान में इसे "अवैध हस्तक्षेप" माना गया।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में कहा, "ट्रंप का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया अमेरिका की ईरान के प्रति दादागिरी और अवैध नीति का विस्तार है। यह न केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है, बल्कि ईरान के नागरिकों के खिलाफ हिंसा और आतंकवाद को उकसाने जैसा है।" मंत्रालय ने चेतावनी दी कि "ऐसी स्थिति पूरे क्षेत्र को और अधिक अस्थिर कर सकती है और इसके सभी परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिकी सरकार पर होगी।
" ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका और इजरायल प्रदर्शनों के पीछे हैं, और किसी भी हस्तक्षेप से अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा पैदा होगा।
विदेश मंत्री **अब्बास अराघची** ने ट्रंप के बयान को "लापरवाह और खतरनाक" बताते हुए कहा कि ईरानी सेना "स्टैंडबाय" पर है और किसी भी संप्रभुता उल्लंघन पर "सटीक निशाना" लगाने के लिए तैयार है।
ईरान के राष्ट्रपति **मसूद पेजेशकियान** ने स्थिति को "हमारी गलती" बताते हुए लोगों से संवाद की अपील की है, लेकिन सुप्रीम लीडर **अयातुल्ला अली खामेनेई** के समर्थक इसे "बाहरी ताकतों की साजिश" मान रहे हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव और भविष्य की आशंका ट्रंप की धमकी से ईरान में प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ा है, लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि यह अमेरिका के लिए "रणनीतिक दुविधा" पैदा कर रहा है—अगर हस्तक्षेप नहीं हुआ तो विरोध कमजोर पड़ सकता है, और अगर हुआ तो पूर्ण युद्ध का खतरा। जून 2025 के हमलों के बाद दोनों देश पहले ही टकराव में हैं, और अब क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है।
ईरान के कई विश्लेषकों का मानना है कि बाहरी ताकतें (खासकर अमेरिका और इजरायल) "भाड़े के टट्टू" के जरिए अराजकता फैला रही हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि मध्य पूर्व में अस्थिरता से सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका को ही होगा। ईरान की अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय प्रभाव पर निर्भरता को देखते हुए, मीडिया और प्रवक्ताओं को संयम बरतना चाहिए—वरना स्थिति और बिगड़ सकती है। यह घटनाक्रम 2026 को "अनिश्चितता का साल" बना सकता है।
ईरान के लोग बाहरी हस्तक्षेप का विरोध कर रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुप्पी साधे बैठा है। अगर ट्रंप ने कुछ भी गलती की तो 12 दिन वाली जंग नही होगी लेकिन इज़राइल के लिए स्पष्ट रुप से अस्तित्व का ख़तरा होगा
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Sajjadali Nayani ✍