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Monday, 19 January 2026

ईडी के 'बेलगाम घोड़े' पर झारखंड पुलिस की सवारी: जब रांची में उलटा रेड हुआ!

ईडी के 'बेलगाम घोड़े' पर झारखंड पुलिस की सवारी: जब रांची में उलटा रेड हुआ!
-Friday World January 19,2026 
भारत की राजनीति में ये दिन अब आम होते जा रहे हैं, जहां केंद्र की जांच एजेंसियां राज्यों में छापेमारी करती हैं, लेकिन कभी-कभी स्थिति पलट जाती है। ठीक वैसा ही 15 जनवरी 2026 को झारखंड की राजधानी रांची में देखने को मिला, जब हेमंत सोरेन सरकार की पुलिस ने Enforcement Directorate (ED) के जोनल ऑफिस में घुसकर छापेमारी की। ये वो ED दफ्तर था, जो अक्सर विपक्षी नेताओं के घरों पर दस्तक देता है, लेकिन इस बार खुद उसके दरवाजे पर पुलिस की दस्तक पड़ी। 

 पूरा मामला क्या है? सब कुछ शुरू हुआ पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (Drinking Water and Sanitation Department) के पूर्व कर्मचारी संतोष कुमार से। संतोष कुमार पर 23 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। ED ने इस मामले में जांच चलाई और 9 करोड़ रुपये तक बरामद किए। 12 जनवरी 2026 को संतोष कुमार को ED ऑफिस बुलाया गया पूछताछ के लिए। 

संतोष कुमार ने दावा किया कि ED के सहायक निदेशक प्रतीक और उनके सहयोगी शुभम ने उन्हें केबिन में बंद करके बेरहमी से पीटा। इतना गंभीर हमला कि सिर पर छह टांके लगे। आरोप है कि ED अधिकारियों ने जबरन अपराध कबूल करवाने का दबाव बनाया और पहले से तैयार ड्राफ्ट पर दस्तखत करवाए।

 इसके बाद संतोष कुमार ने 13 जनवरी को रांची के एयरपोर्ट थाने में FIR दर्ज कराई। जब ED अधिकारी समन पर नहीं पहुंचे, तो 15 जनवरी की सुबह सदर DSP संजीव बेसरा के नेतृत्व में पुलिस टीम ED ऑफिस पहुंची। पुलिस ने ऑफिस में प्रवेश किया, CCTV फुटेज मांगा और कई घंटों तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि ED को अपनी सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बल (पैरामिलिट्री फोर्स) बुलानी पड़ी। 

 हाईकोर्ट ने क्या कहा? घटना के कुछ घंटों बाद ED ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। 16 जनवरी को हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर तत्काल रोक लगा दी और पुलिस कार्रवाई को "प्रथम दृष्टया पूर्व-नियोजित" करार दिया। कोर्ट ने ED ऑफिस की सुरक्षा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (जैसे BSF या CRPF) को सौंपने का आदेश दिया। साथ ही राज्य सरकार को 7 दिनों में जवाब दाखिल करने को कहा। 

कोर्ट ने साफ कहा कि अगर ED ऑफिस में कोई अनहोनी हुई तो रांची SSP जिम्मेदार होंगे। संतोष कुमार को भी पार्टी बनाकर जवाब मांगा गया। 


 राजनीतिक बयानबाजी और बंगाल कनेक्शन बीजेपी ने इसे "बंगाल मॉडल" का झारखंड संस्करण करार दिया। विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई का मकसद ED के पास मौजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े सबूतों को नष्ट करना है। उन्होंने CBI जांच की मांग की। 
दूसरी ओर, घटना को ED की "बेलगाम" छवि से जोड़ा जा रहा है। कई लोग कहते हैं कि केंद्र की एजेंसियों पर अब राज्यों में भरोसा कम होता जा रहा है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार पहले ही ED अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है, और अब झारखंड में भी यही ट्रेंड दिख रहा है।

ED की छवि पर सवाल ED को अक्सर "गृह मंत्रालय का बेलगाम घोड़ा" कहा जाता है—जो बिना लगाम के दौड़ता है। लेकिन इस घटना ने सवाल खड़े किए हैं: 

- क्या केंद्रीय एजेंसियां वाकई निष्पक्ष जांच करती हैं?

 - क्या आरोपी के साथ मारपीट जैसे आरोप सही साबित होते हैं तो क्या होगा? 

- क्या राज्य सरकारें अब सीधे केंद्र की एजेंसियों से टकराव मोल लेंगी? 

यह घटना सिर्फ एक FIR या रेड की नहीं है—ये केंद्र-राज्य संबंधों में बढ़ते तनाव की नई कड़ी है। जहां एक तरफ ED विपक्षी नेताओं पर शिकंजा कस रही है, वहीं दूसरी तरफ राज्य पुलिसें "उलटा रेड" करके जवाब दे रही हैं। 

आगे क्या होगा? हाईकोर्ट की सुनवाई 9 फरवरी को है। तब तक ये विवाद राजनीतिक तापमान और बढ़ाएगा। जनता में ED के प्रति विश्वसनीयता पहले ही कम हो चुकी है—और इस तरह की घटनाएं उसे और कमजोर कर सकती हैं।

 क्या ये "जंगलराज" है या "संघीय ढांचे की रक्षा"? समय बताएगा। लेकिन फिलहाल, रांची का ED ऑफिस अब सिर्फ जांच का केंद्र नहीं—एक राजनीतिक युद्धक्षेत्र बन चुका है।

 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World January 19,2026