-Friday World January 14,2026
– वह पावन पर्व जो पूरे देश को एक सूत्र में बाँधता है। यह त्योहार सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जिससे उत्तरायण की शुरुआत होती है। दिन लंबे होने लगते हैं, सर्दी का प्रभाव कम होता है और प्रकृति नई ऊर्जा से भर उठती है।
कृषि प्रधान भारत में यह नई फसल का स्वागत, सूर्य की आराधना और सामाजिक एकता का महापर्व है। यहाँ कुछ खूबसूरत दृश्य देखिए
– गुजरात के आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ती हुईं:
धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व मकर संक्रांति सौर कैलेंडर पर आधारित प्रमुख हिंदू त्योहार है। सूर्य जब दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ते हैं, तब यह क्षण आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। महाभारत में भीष्म पितामह ने इसी दिन अपने शरीर का त्याग किया था, क्योंकि उत्तरायण को मोक्ष प्राप्ति का शुभ काल माना गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है
– इस दिन से दिन की लंबाई बढ़ने लगती है, मौसम में सकारात्मक बदलाव आता है और फसल कटाई का मौसम पूरा होता है। सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और ज्ञान का प्रतीक मानकर उनकी विशेष पूजा की जाती है।
पूरे भारत में अलग-अलग नाम और रंगीन परंपराएँ भारत की सबसे खास बात यही है कि एक ही त्योहार अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रूप धारण कर लेता है, फिर भी भाव एक ही रहता है – कृतज्ञता और खुशी।
गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण
– अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का समय। आसमान रंगों से भर जाता है, लोग छतों पर चढ़कर पतंग उड़ाते हैं और 'कैचे' (कट गई!) की आवाजें गूंजती हैं।
तमिलनाडु में पोंगल** – चार दिनों का भव्य उत्सव। भोगी पोंगल, सूर्य पोंगल, मट्टू पोंगल और कन्नुम पोंगल
– नए चावल से मीठा पोंगल बनाया जाता है। गाय-बैल सजाए जाते हैं और प्रकृति का आभार माना जाता है। यहाँ पोंगल की पारंपरिक झलक:
पंजाब में लोहड़ी
– एक दिन पहले अलाव जलाकर तिल, रेवड़ी, मूंगफली चढ़ाई जाती है। नाच-गाना, लोकगीत और नए साल की शुरुआत का उत्सव। नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए विशेष महत्व। लोहड़ी की गर्मजोशी भरी झलक: **पश्चिम बंगाल में गंगा सागर मेला**
– लाखों श्रद्धालु गंगा सागर में स्नान करते हैं। पातिसापता, पीठे जैसे पकवान बनाए जाते हैं।
गंगा सागर की भव्यता:
असम में माघ बिहू या भोगाली बिहू
– नई फसल से बने पिठा और लारू का स्वाद। समुदायिक भोज और पारंपरिक खेल। बिहार और उत्तर प्रदेश में खिचड़ी पर्व**
– खिचड़ी बनाकर दान किया जाता है। तिल-गुड़ की मिठाई बाँटी जाती है।
कर्नाटक में एल्लु बेल्ला– तिल और गुड़ मिलाकर 'एल्लु बेल्ला' बाँटते हैं और मीठी-मीठी बातें करते हैं।
पारंपरिक भोजन और दान की महिमा यह त्योहार तिल-गुड़ की मिठास से भरा होता है। तिल शरीर को गर्म रखता है और गुड़ ऊर्जा देता है। खिचड़ी, पोंगल, चिक्की, तिल के लड्डू – हर जगह नए अनाज से बने व्यंजन बनाए जाते हैं। दान का विशेष महत्व है – कंबल, अनाज, तिल, गुड़ गरीबों को बाँटने से पुण्य मिलता है।
: एकता में विविधता मकर संक्रांति सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है –
- पुरानी बातों को छोड़कर नई शुरुआत
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता
- समाज में भाईचारा और दान
- सूर्य की तरह तेजस्वी और ऊर्जावान बनना आज के व्यस्त जीवन में यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हम प्रकृति से कितने गहराई से जुड़े हैं।
तो आइए, इस मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाएँ, तिल-गुड़ खाएँ, खिचड़ी बाँटें और उत्तरायण की नई रोशनी को दिल से अपनाएँ।
सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ!
तिल गुड़ घ्या, गोड़ बोला! 🌞🪁✨
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 14,2026