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Monday, 16 February 2026

चीन ने अरुणाचल प्रदेश से मात्र 800 किलोमीटर दूर पहाड़ों में परमाणु हथियारों के गुप्त ठिकाने बनाए: बढ़ती हुई परमाणु ताकत का खतरनाक संकेत

चीन ने अरुणाचल प्रदेश से मात्र 800 किलोमीटर दूर पहाड़ों में परमाणु हथियारों के गुप्त ठिकाने बनाए: बढ़ती हुई परमाणु ताकत का खतरनाक संकेत
-Friday World 17th February 2026
दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती परमाणु शक्ति बन रही है चीन। हाल ही में जारी अमेरिकी जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस और न्यूयॉर्क टाइम्स के विस्तृत रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि चीन ने दक्षिण-पश्चिमी प्रांत सिचुआन की पहाड़ियों में गुप्त बंकर और परमाणु सुविधाएं तेजी से विकसित की हैं। ये ठिकाने अरुणाचल प्रदेश से सिर्फ 800 किलोमीटर की दूरी पर हैं, जो भारत के लिए सीधा सुरक्षा खतरा पैदा करते हैं। 

 सिचुआन की पहाड़ियों में छिपे परमाणु रहस्य सिचुआन प्रांत की हरी-भरी, धुंध से ढकी घाटियों में 2022 से 2026 तक की सैटेलाइट इमेजरी से पता चला है कि चीन ने जितोंग (Zitong) और पिंगटोंग (Pingtong) नामक स्थानों पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किया है। जितोंग घाटी में नए बंकर, मजबूत दीवारें और विशाल पाइपलाइनों का जाल बिछाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सामान्य सैन्य बंकर नहीं हैं, बल्कि उच्च-विस्फोटक परीक्षण (high-explosives testing) के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं – जो परमाणु हथियारों के डेटोनेटर को परफेक्ट करने की प्रक्रिया है। 

दूसरी ओर, पिंगटोंग में डबल-फेंस वाली एक भारी सुरक्षित सुविधा है, जहां 360 फुट ऊंची वेंटिलेशन स्टैक और नए वेंट्स लगाए गए हैं। अमेरिकी विशेषज्ञों के अनुसार, यहां प्लूटोनियम से बने परमाणु वॉरहेड के कोर (pits) का उत्पादन हो रहा है। प्रवेश द्वार पर शी जिनपिंग का नारा "Stay true to the founding cause and always remember our mission" लिखा हुआ है, जो साफ तौर पर दिखता है कि ये काम चीन की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का हिस्सा है।

 ये सुविधाएं पहाड़ों की गहराई में छिपी हुई हैं ताकि दुनिया की नजरों से दूर रहें। सैटेलाइट इमेज में दिख रही गतिविधियां 2019 से तेज हुई हैं, और अब ये परमाणु उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ा रही हैं। 

चीन की परमाणु संख्या में तेज उछाल अमेरिकी पेंटागन और फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के पास 2024 के अंत तक 600 से ज्यादा परमाणु वॉरहेड हो चुके हैं। कुछ अनुमानों में यह संख्या 500 से शुरू होकर अब 600 के पार पहुंच गई है। चीन का लक्ष्य 2030 तक 1,000 से ज्यादा वॉरहेड वाला बनना है। 

पहले अनुमान 250-350 वॉरहेड के आसपास थे, लेकिन तेजी से बढ़ोतरी ने दुनिया को चौंका दिया है। MIT (मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) के विशेषज्ञों का कहना है कि सिचुआन की ये नई सुविधाएं भारत जैसे पड़ोसी देशों के लिए बड़ी चिंता का विषय हैं। चीन न सिर्फ संख्या बढ़ा रहा है, बल्कि ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल), सबमरीन-लॉन्च्ड मिसाइल और बॉम्बर जैसे डिलीवरी सिस्टम को भी मजबूत कर रहा है। 


भारत के लिए बढ़ता खतरा अरुणाचल प्रदेश से मात्र 800 किमी दूर ये परमाणु ठिकाने भारत की सीमा के बहुत करीब हैं। चीन पहले से ही LAC पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है, और अब परमाणु ताकत का यह विस्तार क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन खुद को अमेरिकी परमाणु दबाव से मुक्त करने की कोशिश कर रहा है, खासकर ताइवान जैसे मुद्दों पर। लेकिन इसका असर भारत जैसे पड़ोसियों पर भी पड़ेगा।

 दुनिया में परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के पुराने समझौते कमजोर हो रहे हैं, और चीन की यह तेजी से बढ़ती ताकत वैश्विक शांति के लिए खतरा बन सकती है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बदलाव चीन को वैश्विक महाशक्ति बनाने की महत्वाकांक्षा का हिस्सा हैं, लेकिन इससे नए हथियार दौड़ की शुरुआत हो सकती है। 

 सतर्कता की घड़ी चीन की परमाणु महत्वाकांक्षा अब छिपी नहीं रही। सैटेलाइट इमेज, विशेषज्ञ विश्लेषण और आधिकारिक रिपोर्ट्स सब एक ही बात कह रही हैं – बीजिंग अपनी परमाणु ताकत को अभूतपूर्व गति से बढ़ा रहा है। भारत को अपनी रक्षा रणनीति, मिसाइल डिफेंस और कूटनीतिक प्रयासों को और मजबूत करना होगा। दुनिया को भी इस बढ़ते खतरे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि परमाणु हथियारों की दौड़ किसी के भले की नहीं है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 17th February 2026