-Friday World 16th Feb 2026
दुनिया के सबसे बड़े पर्यटन और व्यापार बाजार चीन ने एक बार फिर अपने दरवाजे और खोल दिए हैं—इस बार ब्रिटेन और कनाडा के नागरिकों के लिए। कल यानी 17 फरवरी 2026 से इन दोनों देशों के सामान्य पासपोर्ट धारक बिना वीजा के चीन में 30 दिनों तक रह सकेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक घोषणा की है, जिसके तहत पर्यटन, व्यापार, परिवार या दोस्तों से मिलने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ट्रांजिट के लिए यह सुविधा उपलब्ध होगी। यह नीति फिलहाल 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी।
यह फैसला चीन की एकतरफा वीजा-मुक्त नीति का विस्तार है, जिसके तहत अब 79 देशों के नागरिक बिना वीजा के चीन आ सकते हैं। ब्रिटेन और कनाडा के शामिल होने से Five Eyes गठबंधन (अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड) में सिर्फ अमेरिका ही ऐसा देश रह गया है, जिसके नागरिकों को अभी भी वीजा की जरूरत पड़ती है।
इस घोषणा का बैकग्राउंड पिछले महीने की कूटनीतिक गतिविधियों से जुड़ा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने जनवरी में चीन की यात्रा की थी, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई। दोनों नेताओं के बीच यात्रा नियमों को आसान बनाने पर सहमति बनी। स्टार्मर ने इसे 'ऐतिहासिक' कदम बताया और कहा कि इससे ब्रिटिश कारोबारियों को चीन में विस्तार करना आसान होगा। इसी तरह कनाडा के प्रधानमंत्री भी हाल में बीजिंग गए थे, जहां इसी तरह की बातचीत हुई।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए चीन ने कनाडा और ब्रिटेन के सामान्य पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा-मुक्त नीति लागू करने का फैसला किया है। यह 17 फरवरी से प्रभावी होगा और 30 दिनों तक ठहरने की अनुमति देगा।” यह कदम चीनी नववर्ष (स्प्रिंग फेस्टिवल) के दौरान आया है, जो दुनिया का सबसे बड़ा यात्रा उत्सव है और लाखों लोग यात्रा करते हैं।
व्यापार और पर्यटन पर क्या असर? यह नीति दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई गति दे सकती है। ब्रिटेन और कनाडा के कारोबारी अब बिना वीजा की जटिल प्रक्रिया के चीन जा सकेंगे, मीटिंग्स कर सकेंगे, फैक्टरियां देख सकेंगे और नए सौदे कर सकेंगे। पर्यटन क्षेत्र में भी उछाल आने की उम्मीद है—ग्रेट वॉल, फॉरबिडन सिटी, शंघाई की चमकती गगनचुंबी इमारतें, शेनझेन की टेक हब और गुआंगझू के बाजार अब और आसानी से देखे जा सकेंगे।
चीन पहले से ही कई यूरोपीय देशों (जर्मनी, फ्रांस, इटली आदि), ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्राजील जैसे देशों को वीजा-फ्री सुविधा दे रहा है। अब ब्रिटेन और कनाडा के शामिल होने से कुल संख्या 79 हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पोस्ट-कोविड पर्यटन को रिकवर करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
आलोचकों की चिंताएं हालांकि इस फैसले का स्वागत हो रहा है, लेकिन आलोचक इसे लेकर सतर्क हैं। मानवाधिकार संगठन और सुरक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि बीजिंग के साथ संबंध सुधारने की होड़ में उइगर मुसलमानों पर अत्याचार, हांगकांग में लोकतंत्र की कुचली गई आवाज, ताइवान पर दबाव और साइबर जासूसी जैसी गंभीर चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। ब्रिटेन में कुछ सांसदों ने कहा कि आर्थिक लाभ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। कनाडा में भी इसी तरह की बहस छिड़ी है, जहां हूआवेई केस और चीनी हस्तक्षेप के पुराने मुद्दे अभी भी जिंदा हैं।
फिर भी, दोनों देशों के नेता इसे 'प्रगतिशील कदम' बता रहे हैं। स्टार्मर ने कहा, “यह समझौता ब्रिटिश व्यवसायों के लिए चीन में अवसर बढ़ाएगा और लोगों के बीच जुड़ाव मजबूत करेगा।” कनाडाई पक्ष ने भी इसे द्विपक्षीय संबंधों में 'नई शुरुआत' करार दिया।
क्या आगे और देश शामिल होंगे? चीन की यह नीति अस्थायी है और 2026 के अंत तक सीमित है, लेकिन अगर यह सफल रही तो इसे स्थायी या और देशों तक विस्तारित किया जा सकता है। अमेरिका के साथ तनाव के बीच यह कदम पश्चिमी देशों को अलग-अलग करके चीन की 'डिवाइड एंड रूल' रणनीति को भी दर्शाता है।
चाहे आलोचना हो या स्वागत, यह फैसला वैश्विक यात्रा और व्यापार के नक्शे पर एक नया अध्याय जोड़ रहा है। अगर आप ब्रिटेन या कनाडा से हैं, तो अब चीन घूमने का प्लान बनाने का सही समय है—बिना वीजा की टेंशन के!
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 16th Feb 2026