प्रतिकात्मक तस्वीर
असम की राजनीति में बड़ा उलटफेर! विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को करारा झटका लगा है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान को अपना त्यागपत्र भेजते हुए विस्तार से बताया कि यह फैसला पार्टी के भविष्य और आंतरिक स्थिति को लेकर गहरी चिंता से लिया गया है। बोरा ने कहा, “मैंने 32 साल पार्टी को दिए हैं। 1994 में जुड़ा था। यह कोई व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि पार्टी के कल की चिंता है।”
भूपेन बोरा, जो 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और दो बार विधायक भी चुने गए, ने इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उन्होंने आत्मसम्मान बचाने के लिए यह कदम उठाया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर संगठनात्मक फैसलों में देरी और अनदेखी का आरोप लगाया। बोरा ने कहा कि वे राजनीति से दूर नहीं हो रहे, लेकिन कांग्रेस में रहकर आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।
इस इस्तीफे पर असम के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए बोरा को “असम कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता” बताया, जिनके माता-पिता कभी विधायक या मंत्री नहीं रहे। सरमा ने दावा किया, “भूपेन बोरा असम कांग्रेस में आखिरी ऐसे व्यक्ति थे जो सामान्य परिवार से आए और आगे बढ़े। उनका इस्तीफा प्रतीकात्मक संदेश देता है कि कांग्रेस में आम परिवार का कोई भी व्यक्ति आगे नहीं बढ़ सकता।”
सरमा ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अब विशेष समुदायों को खुश करने में लगी है, जिससे सामान्य हिंदू कार्यकर्ता हाशिए पर चले गए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के जिला स्तर के कई कार्यालयों में मीटिंग्स अब खास समुदाय की प्रार्थना से शुरू होती हैं और पार्टी में अल्पसंख्यक नेताओं को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। सरमा ने भविष्यवाणी की कि आने वाले हफ्तों में और कई वरिष्ठ नेता कांग्रेस छोड़ सकते हैं, जिससे पार्टी की स्थिति और खराब होगी।
मुख्यमंत्री ने बोरा के इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा, “मैं उनके फैसले का स्वागत करता हूं। हालांकि, उन्होंने अभी तक बीजेपी से संपर्क नहीं किया है। कल शाम मैं उनके घर जाऊंगा। तीन साल पहले भी हम उन्हें स्वागत करने और सुरक्षित सीट देने के लिए तैयार थे।” सरमा ने स्पष्ट किया कि अगर बोरा बीजेपी में शामिल होना चाहें तो पार्टी के दरवाजे खुले हैं और उन्हें सुरक्षित सीट पर चुनाव लड़वाने की कोशिश की जाएगी।
यह घटना असम में कांग्रेस की कमजोर स्थिति को और उजागर करती है। पिछले साल गौरव गोगोई को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से बोरा और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे थे। टिकट वितरण, संगठनात्मक फैसलों और पार्टी की दिशा को लेकर असंतोष गहरा था। बोरा के इस्तीफे से कांग्रेस के हिंदू वोट बैंक पर असर पड़ सकता है, खासकर तब जब असम में बीजेपी पहले से मजबूत स्थिति में है।
भूपेन बोरा ने इस्तीफे के बाद कहा कि वे कोई गोपनीय कदम नहीं उठाएंगे और उचित समय पर मीडिया से विस्तार से बात करेंगे। उन्होंने पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे कांग्रेस के भविष्य पर गंभीरता से सोचें और जरूरी बदलाव लाएं।
असम विधानसभा चुनाव मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है। कांग्रेस विपक्षी गठबंधन के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, लेकिन बोरा जैसे वरिष्ठ नेता के जाने से पार्टी की चुनौतियां बढ़ गई हैं। दूसरी ओर, बीजेपी इस घटना को कांग्रेस के पतन का संकेत बताकर हमला बोल रही है।
यह इस्तीफा सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि असम कांग्रेस की आंतरिक कमजोरियों और बदलते राजनीतिक समीकरणों का प्रतीक है। क्या बोरा बीजेपी में शामिल होंगे? क्या और नेता कांग्रेस छोड़ेंगे? आने वाले दिन जवाब देंगे। फिलहाल, असम की सियासत में हलचल तेज है और चुनावी मैदान गर्म हो रहा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 16th Feb 2026