जब केंद्रीय मंत्री हर्दीप सिंह पूरी ने जेफरी एपस्टीन से अपनी मुलाकातों को महज "3-4 बार" और ईमेल को "एक या दो" बताया, तो लगा कि मामला खत्म हो गया। लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टीम, खासकर पवन खेड़ा ने अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी एपस्टीन फाइल्स की गहराई में उतरकर एक बड़ा खुलासा किया। पूरी ने जो दावा किया, वह सच से कोसों दूर था – रिकॉर्ड्स बताते हैं कि 2014 से 2017 के बीच 62 ईमेल एक्सचेंज हुए और 14 फेस-टू-फेस मीटिंग्स दर्ज हैं। यह सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि सार्वजनिक दस्तावेजों पर आधारित तथ्य है जो पूरी की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है।
एपस्टीन फाइल्स का बैकग्राउंड: क्या है यह विवाद?
जेफरी एपस्टीन, अमेरिकी वित्तपति और दोषी बाल यौन शोषण के आरोपी, की मौत के बाद यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने 2026 में लाखों पेज के दस्तावेज सार्वजनिक किए। इनमें कई हस्तियों के नाम आए, लेकिन भारत में हलचल तब मची जब हर्दीप पूरी का नाम सामने आया। पूरी, जो उस समय भारत के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत रह चुके थे और बाद में मोदी सरकार में मंत्री बने, ने एपस्टीन से मुलाकातों को "प्रोफेशनल" और "सीमित" बताया। उन्होंने कहा कि मीटिंग्स इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) और मल्टीलेटरलिज्म कमीशन के काम से जुड़ी थीं, और कोई आपराधिक गतिविधि से संबंध नहीं था। लेकिन कांग्रेस ने इन दावों को झूठा साबित कर दिया।
पवन खेड़ा का खुलासा: कैसे पकड़ा गया झूठ?
कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से बताया कि एपस्टीन फाइल्स में पूरी ने 32 ईमेल भेजे और 30 प्राप्त किए – कुल 62 एक्सचेंज। मीटिंग्स की संख्या और भी चौंकाने वाली है: 2014 में ही 9 मीटिंग्स दर्ज हैं, और कुल 14 मुलाकातें 2017 तक चलीं। खास तारीखें बताई गईं – 5, 6, 8, 9 जून; 19, 23, 24 सितंबर; और 9, 10 अक्टूबर 2014। खेड़ा ने सवाल उठाया: "इन मीटिंग्स में क्या चर्चा हुई? पूरी जी ने 3-4 मीटिंग्स और एक-दो ईमेल का दावा किया, लेकिन रिकॉर्ड कुछ और कहते हैं।"
खेड़ा ने आगे कहा कि पूरी ने इंटरव्यू में कई "झूठ" बोले। जैसे, उन्होंने एपस्टीन को "दो चेहरे वाला" कहा और खुद को "सही व्यक्ति नहीं" बताया, लेकिन ईमेल में वे एपस्टीन से सलाह मांगते दिखते हैं – "Any advice?" जैसे वाक्य। कांग्रेस का दावा है कि यह झूठ क्यों? क्या कोई बड़ा राज छिपाया जा रहा है?
पूरी का बचाव और कांग्रेस का पलटवार
पूरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मीटिंग्स "डेलीगेशन" के साथ थीं, ईमेल सिर्फ एक था (रेड हॉफमैन को कॉपी), और कोई गलत इरादा नहीं था। उन्होंने राहुल गांधी पर "स्मियर कैंपेन" और "बफूनरी" का आरोप लगाया। लेकिन कांग्रेस ने पलटवार किया: "अगर इतना साफ है, तो इस्तीफा क्यों नहीं देते? 62 ईमेल और 14 मीटिंग्स को कैसे 3-4 में बदल दिया?"
एपस्टीन के अपराधों की गंभीरता को देखते हुए, कांग्रेस ने सवाल उठाया: "एक ऐसे व्यक्ति से इतने संपर्क, जो बच्चियों के यौन शोषण का दोषी था – क्या यह नैतिक रूप से सही है? क्या सरकार को जवाबदेही नहीं दिखानी चाहिए?"
राजनीतिक प्रभाव और बड़ा सवाल
यह विवाद सिर्फ हर्दीप पूरी तक सीमित नहीं। राहुल गांधी ने लोकसभा में इसे उठाया और कहा कि ऐसे कनेक्शन भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर असर डाल सकते हैं। विपक्ष का कहना है कि यह "मोरल इश्यू" है – कानूनी नहीं, लेकिन नैतिकता का। पूरी ने इस्तीफे की मांग को खारिज किया, लेकिन कांग्रेस ने दोहराया: "सच सामने आ चुका है, अब इस्तीफा दो।"
एपस्टीन फाइल्स ने कई बड़े नामों को हिलाया है, लेकिन भारत में यह राजनीतिक तूफान बन गया। क्या यह सिर्फ राजनीति है, या सच में कोई बड़ा खुलासा? समय बताएगा। फिलहाल, हर्दीप पूरी का "3-4 मीटिंग्स" वाला दावा धराशायी हो चुका है – धन्यवाद राहुल गांधी की टीम और पवन खेड़ा के गहन विश्लेषण को!
यह मामला याद दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता कितनी जरूरी है। झूठ पकड़ा जाना आसान हो जाता है जब दस्तावेज खुल जाते हैं। अब सवाल जनता के सामने है: क्या मंत्री जी जवाब देंगे, या चुप्पी साध लेंगे?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World | 18th Feb 2026