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Tuesday, 17 March 2026

मोरबी का सिरेमिक हब मिडिल ईस्ट युद्ध की चपेट में: प्रोपेन गैस संकट से 250 से ज्यादा फैक्टरियां बंद, 4 लाख मजदूरों का भविष्य अंधकार में – ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष की सीधी मार गुजरात पर!

मोरबी का सिरेमिक हब मिडिल ईस्ट युद्ध की चपेट में: प्रोपेन गैस संकट से 250 से ज्यादा फैक्टरियां बंद, 4 लाख मजदूरों का भविष्य अंधकार में – ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष की सीधी मार गुजरात पर!
-Friday World March 17,2026 
इज़राइल की दोस्ती की भारी कीमत: ईरान-इज़राइल युद्ध की आग ने मोरबी के 250+ सिरेमिक फैक्टरियों पर ताला लगवा दिया – प्रोपेन गैस की कमी से लाखों मजदूर बेरोजगार, गुजरात की अर्थव्यवस्था पर भयंकर असर!

→ परिचय: वैश्विक युद्ध की चपेट में स्थानीय उद्योग** मार्च 2026 के मध्य में पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई है। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। जवाब में ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर प्रतिबंध लगा दिया है – यह वह महत्वपूर्ण मार्ग है जिससे दुनिया का 20% से ज्यादा तेल और गैस गुजरता है। जहाजों की आवाजाही लगभग थम गई है। प्रोपेन और नेचुरल गैस की आयात में भारी व्यवधान आ गया है। इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सबसे भयानक स्थानीय असर अब गुजरात के मोरबी पर पड़ रहा है – भारत का सिरेमिक और टाइल्स का सबसे बड़ा केंद्र। 

→ मोरबी: भारत का सिरेमिक साम्राज्य 
मोरबी को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक उत्पादन केंद्र माना जाता है। यहां लगभग 750-800 सिरेमिक फैक्टरियां हैं। देश का 90% से ज्यादा टाइल्स और सैनिटरी वेयर का उत्पादन यहीं होता है। इस उद्योग का वार्षिक टर्नओवर अरबों रुपये में है। सीधे और परोक्ष रूप से 4 लाख से ज्यादा मजदूर इससे जुड़े हैं। यह उद्योग मोरबी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है – ट्रांसपोर्ट, होटल, दुकानें, बैंकिंग और स्थानीय व्यापार सब इसी पर टिका है। लेकिन आज यह पूरा औद्योगिक ढांचा ढहने के कगार पर खड़ा है। 

→ प्रोपेन गैस की कमी से उद्योग पर घातक प्रहार सिरेमिक टाइल्स बनाने के लिए किल्न (भट्टियां) को 1200-1400 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रखना पड़ता है। इसके लिए प्रोपेन गैस और नेचुरल गैस मुख्य ईंधन हैं। प्रोपेन तेजी से जलता है और बहुत अधिक गर्मी देता है, इसलिए यह औद्योगिक उपयोग के लिए आदर्श है। मोरबी में रोजाना लगभग 55 लाख क्यूबिक मीटर प्रोपेन का इस्तेमाल होता है। ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रुक गई। प्रोपेन और एलएनजी टैंकर अटक गए। गुजरात गैस और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों ने सप्लाई रोक दी। नतीजा – मोरबी में 250 से ज्यादा फैक्टरियों ने तुरंत उत्पादन बंद कर दिया। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 170-225 यूनिट पहले ही बंद हो चुकी हैं और संख्या बढ़ रही है। मोरबी सिरेमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज अरवाड़िया और अन्य उद्योगपतियों ने चेतावनी दी है कि अगर 15 मार्च तक सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो पूरा उद्योग सामूहिक रूप से बंद (कलेक्टिव शटडाउन) हो जाएगा। 

→ उत्पादन और निर्यात में भारी नुकसान 
एक महीने का शटडाउन करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा सकता है। निर्यात – जो उत्पादन का बड़ा हिस्सा है – 25% से ज्यादा गिर चुका है। आने वाले महीनों में टाइल्स की कीमतों में 15% तक बढ़ोतरी संभव है। राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 7 बिलियन डॉलर का यह उद्योग कई जगहों पर सिर्फ 20% क्षमता पर चल रहा है। आयातित प्रोपेन पर निर्भर फैक्टरियां सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। 

→ मजदूरों का पलायन और रोजगार संकट फैक्टरियां बंद होने से सबसे ज्यादा मार मजदूरों पर पड़ी है। मोरबी में काम करने वाले अधिकांश मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और झारखंड से आते हैं। काम न होने से वे अपने गांव लौट रहे हैं। मोरबी रेलवे स्टेशन पर टिकट के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। फैक्टरियों में रहने-खाने की व्यवस्था करने वाले परिवार अब अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। अगर संकट लंबा चला तो हजारों कुशल और अकुशल मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। इसका असर पूरे शहर पर पड़ेगा – छोटे व्यापारी से लेकर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर तक। 

→ इज़राइल से दोस्ती और भारत पर असर भारत की इज़राइल के साथ रक्षा, तकनीक और कूटनीति में मजबूत दोस्ती है। लेकिन वर्तमान संघर्ष में अमेरिका-इज़राइल के साथ खड़े होने से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा है। ईरान ने होर्मुज़ को बंद करके वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को निशाना बनाया है – जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है। तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। औद्योगिक उत्पादन ठप है। मोरबी के उद्योगपति सवाल उठा रहे हैं – "हमारी दोस्ती की कीमत इतनी भारी क्यों?" गुजरात सरकार ने समस्या के समाधान के लिए कमिटी बनाई है। केंद्र सरकार वैकल्पिक स्रोत तलाश रही है। लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर है। 

→ आगे क्या होगा? अगर युद्ध जल्दी खत्म नहीं हुआ तो मोरबी का सिरेमिक उद्योग महीनों तक बंद रह सकता है। रोजगार के नुकसान बढ़ेंगे। गुजरात की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा। यह संकट एक कड़वा सबक दे रहा है – वैश्विक राजनीति और युद्ध की आग स्थानीय उद्योगों और आम आदमी तक पहुंचती है। मोरबी के मजदूर और उद्योगपति अब सिर्फ एक चीज की उम्मीद कर रहे हैं – जल्द शांति बहाल हो और गैस सप्लाई सामान्य हो जाए। 

→ सामूहिक प्रयास की जरूरत यह समय है कि सरकार, उद्योग और समाज मिलकर काम करें। मोरबी का भविष्य गुजरात और भारत के औद्योगिक विकास से जुड़ा है। इस संकट को जल्द हल करना जरूरी है – वरना नुकसान अपूरणीय हो जाएगा। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 17,2026