-Friday World March 15, 2026
पश्चिम एशिया के आकाश में एक ऐसा हथियार घूम रहा है जो दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं को रातों की नींद उड़ा रहा है। यह कोई सामान्य ड्रोन नहीं, बल्कि ईरान का **कर्रार (Karrar)** जेट-पावर्ड यूएवी है – जो अब एक साधारण निगरानी प्लेटफॉर्म से आगे बढ़कर इंटरसेप्टर, बॉम्बर, सुसाइड अटैक और एयर-टू-एयर कॉम्बैट का मल्टी-रोल हथियार बन चुका है।
ईरान ने 2010 में पहली बार इस ड्रोन को दुनिया के सामने पेश किया था, लेकिन हाल के वर्षों में इसके अपग्रेड वर्जन ने इसे और घातक बना दिया है। कर्रार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम लागत में उच्च मारक क्षमता प्रदान करता है – ठीक वैसा ही जो ईरान की A2/AD (Anti-Access/Area Denial) रणनीति के लिए जरूरी है।
कर्रार की तकनीकी ताकत: स्पीड, रेंज और पेलोड
कर्रार एक टर्बोजेट इंजन से संचालित है, जो इसे पारंपरिक प्रोपेलर वाले ड्रोनों से कहीं तेज बनाता है। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- अधिकतम गति लगभग 900 किमी/घंटा (कुछ रिपोर्ट्स में 950 किमी/घंटा तक का जिक्र) – यह इसे सबसोनिक स्पीड पर उड़ने वाला दुश्मन के लिए मुश्किल लक्ष्य बनाता है।
- रेंज: 1,000 किमी तक – यानी यह ईरान से दूर स्थित लक्ष्यों तक पहुंच सकता है, जैसे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के जहाज या इजरायली ठिकाने।
- पेलोड क्षमता: 227-500 किलो तक – इसमें Mk 82 (500 पाउंड) जनरल पर्पस बम, Nasr-1 या Kowsar एंटी-शिप मिसाइलें, Balaban ग्लाइड बम, या दो 250 पाउंड Mk 81 बम ले जा सकता है।
- ऑपरेशनल ऊंचाई: 7.5 से 15 किमी तक (कुछ अपग्रेड वर्जन में 40,000 फीट तक) – उच्च ऊंचाई से यह रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकता है।
यह ड्रोन रनवे की जरूरत नहीं रखता। इसे मोबाइल रेल-लॉन्चर से रॉकेट असिस्टेड टेकऑफ (RATO) बूस्टर की मदद से लॉन्च किया जाता है – बस एक ट्रक या लॉन्चर से सीधे हवा में। मिशन पूरा होने पर पैराशूट से सुरक्षित लैंडिंग भी संभव है, खासकर रेकॉन्सेंस मिशन में।
मल्टी-रोल क्षमता: एक ड्रोन, कई भूमिकाएं कर्रार की असली ताकत इसकी बहुमुखी प्रतिभा में है। ईरान ने इसे तीन मुख्य भूमिकाओं के लिए डिजाइन किया:
1. इंटरसेप्टर: हाल के अपग्रेड में मजीद (Majid) हीट-सीकिंग एयर-टू-एयर मिसाइल (8 किमी रेंज) इंटीग्रेट की गई है। यह दुश्मन के ड्रोनों, हेलीकॉप्टरों या कम ऊंचाई वाले विमानों को हवा में ही नष्ट कर सकता है। ईरानी आर्मी एयर डिफेंस फोर्स ने इसे इंडक्ट किया है, जहां यह दुश्मन एयरक्राफ्ट को ट्रैक, लॉक और डिस्ट्रॉय करता है।
2. बॉम्बर/स्ट्राइक* यह प्रेसिजन गाइडेड बम या एंटी-शिप मिसाइलें ले जाकर ग्राउंड या नौसैनिक लक्ष्यों पर हमला कर सकता है।
3. सुसाइड/वन-वे अटैक: अगर इसे क्रूज मिसाइल मोड में इस्तेमाल किया जाए तो यह लक्ष्य से टकराकर विस्फोट कर सकता है – ठीक एक क्रूज मिसाइल की तरह, लेकिन बहुत सस्ता और बड़े पैमाने पर उत्पादित।
A2/AD रणनीति में कर्रार की भूमिका ईरान की रणनीति पारंपरिक युद्ध में अमेरिका या इजरायल जैसी ताकतों से सीधा मुकाबला करने की नहीं, बल्कि उन्हें महंगा और मुश्किल बनाना है। कर्रार इसमें अहम भूमिका निभाता है:
-स्वार्म अटैक (झुंड हमला): कम लागत और आसान उत्पादन के कारण इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। दर्जनों या सैकड़ों कर्रार एक साथ लॉन्च होने पर दुश्मन के एयर डिफेंस (जैसे पैट्रियट, THAAD या आयरन डोम) को ओवरलोड कर सकते हैं – क्योंकि महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों से सस्ते ड्रोनों को मारना आर्थिक नुकसान है।
- एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल: खाड़ी में अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स को दूर रखने के लिए यह तेज स्पीड और लंबी रेंज से खतरा पैदा करता है। अगर इसे एंटी-रडार मिसाइल के साथ इस्तेमाल किया जाए तो यह दुश्मन के रडार को ब्लाइंड कर सकता है।
- असिमेट्रिक वारफेयर: ईरान जानता है कि पारंपरिक हवाई शक्ति में वह पिछड़ सकता है, इसलिए ड्रोन जैसे सस्ते, डिस्पोजेबल हथियारों से दुश्मन को लगातार परेशान करना उसकी रणनीति है। कर्रार इसी का उन्नत रूप है।
दुनिया के लिए खतरा क्यों? कर्रार सिर्फ ईरान का हथियार नहीं रहा – इसकी तकनीक प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे हूती, हिजबुल्लाह) तक पहुंच सकती है। हाल के वर्षों में ईरान ने ड्रोन स्वार्म अटैक्स में महारत हासिल की है, जहां सैकड़ों सस्ते ड्रोन से दुश्मन की डिफेंस को भ्रमित किया जाता है। कर्रार की जेट स्पीड और एयर-टू-एयर क्षमता इसे और घातक बनाती है – यह न सिर्फ ग्राउंड टारगेट्स, बल्कि हवाई लक्ष्यों को भी निशाना बना सकता है।
पश्चिमी खुफिया एजेंसियां और सेनाएं इसे "गेम-चेंजर" मान रही हैं। क्योंकि यह साबित करता है कि कम संसाधनों वाले देश भी उच्च तकनीक वाले हथियार बना सकते हैं जो महंगे सिस्टम्स को चुनौती दे सकें।
भविष्य का युद्ध ड्रोनों से तय होगा? कर्रार ईरान की ड्रोन क्रांति का प्रतीक है – जहां जेट पावर, मोबाइल लॉन्च और मल्टी-रोल क्षमता मिलकर एक ऐसा हथियार बनाते हैं जो सस्ता, घातक और मुश्किल से रोका जा सके। वेस्ट एशिया के आसमान में यह अब सिर्फ उड़ नहीं रहा, बल्कि दुश्मन की रणनीतियों को बदल रहा है।
जब तक दुनिया महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों पर निर्भर रहेगी, तब तक ऐसे सस्ते लेकिन शक्तिशाली ड्रोनों से "एक्सपोनेंशियल कॉस्ट" का सामना करना पड़ेगा। कर्रार इसी का जीता-जागता सबूत है – एक छोटा सा ड्रोन जो बड़े साम्राज्यों की नींद उड़ा सकता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 15, 2026