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Thursday, 19 March 2026

ओमान के विदेश मंत्री सय्यिद बद्र अल-बुसैदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक ऐतिहासिक और साहसिक बयान दिया है।

ओमान के विदेश मंत्री सय्यिद बद्र अल-बुसैदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक ऐतिहासिक और साहसिक बयान दिया है।
-Friday World March 19,2026 
द इकोनॉमिस्ट में प्रकाशित अपने लेख में उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी है कि "अमेरिका ने अपनी विदेश नीति पर से नियंत्रण खो दिया है।" यह बयान न केवल क्षेत्रीय तनाव को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक शांति के लिए एक गहरी चिंता भी व्यक्त करता है। 

 शांति के करीब पहुंचकर फिर ठोकर लगना पिछले नौ महीनों में दो बार ऐसा हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक वास्तविक समझौते की संभावना मजबूत हो गई थी। यह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी चिंताओं को दूर करने और क्षेत्र में स्थिरता लाने का आधार बन सकता था। ओमान, जो लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता आ रहा है, ने इन बातचीतों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 

लेकिन 28 फरवरी को ठीक वैसा ही हुआ, जिसकी आशंका थी। सबसे ठोस और उत्पादक वार्ता के कुछ ही घंटों बाद इज़राइल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से एक गैर-कानूनी सैन्य हमला कर दिया। यह हमला शांति प्रक्रिया के ठीक बीच में आया, जैसे कोई जानबूझकर आग में घी डाल रहा हो। बद्र अल-बुसैदी इसे "शॉक लेकिन सरप्राइज नहीं" बताते हैं। उन्होंने लिखा है कि यह हमला शांति की उस संभावना को कुचलने वाला था जो "वास्तव में संभव" लग रही थी। 

ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई अपरिहार्य थी। तेहरान ने इसे अपने पड़ोसियों की सरज़मीन पर अमेरिकी ठिकानों पर हमला बताकर जवाब दिया। यह प्रतिक्रिया "गहरा अफसोसनाक और पूरी तरह अस्वीकार्य" थी, लेकिन ईरानी नेतृत्व के सामने शायद यही एकमात्र तर्कसंगत विकल्प बचा था—जब अमेरिका और इज़राइल ने इसे "इस्लामिक रिपब्लिक को समाप्त करने" की जंग करार दिया था। 

अमेरिका की सबसे बड़ी गलतफहमी ओमान के विदेश मंत्री के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन की सबसे बड़ी भूल यही थी कि वह इस जंग में खिंच गया। यह "अमेरिका की जंग नहीं है।" ऐसा कोई परिदृश्य नहीं दिखता जिसमें इज़राइल और अमेरिका दोनों अपनी मंजिल हासिल कर सकें। बल्कि यह जंग अमेरिकी हितों के खिलाफ जा रही है—क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ रही है, तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं, और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। 

बद्र अल-बुसैदी स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि अमेरिका ने अपनी विदेश नीति का नियंत्रण खो दिया है। यह "असहज सत्य" है, लेकिन इसे स्वीकार करना ज़रूरी है। अमेरिका के मित्र देशों की ज़िम्मेदारी है कि वे वाशिंगटन को इस "अवांछित उलझन" से बाहर निकालने में मदद करें। उन्हें सच बोलना होगा—यह जंग अनैतिक और गैर-कानूनी है, और इसे रोकना होगा। 

 क्षेत्रीय मध्यस्थता और ओमान की भूमिका ओमान हमेशा से मध्य पूर्व में संतुलन और संवाद का प्रतीक रहा है। इस छोटे लेकिन बुद्धिमान देश ने कई बार अमेरिका-ईरान के बीच पुल का काम किया है। बद्र अल-बुसैदी खुद इन नवीनतम परमाणु वार्ताओं के प्रमुख मध्यस्थ थे। उन्होंने बार-बार कहा कि बातचीत "सक्रिय और गंभीर" थीं, और शांति "हमारी पहुंच में" थी। लेकिन सैन्य कार्रवाई ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। 

यह लेख सिर्फ आलोचना नहीं है—यह एक रोडमैप भी है। विदेश मंत्री सुझाव देते हैं कि अमेरिका और ईरान को दुश्मनी छोड़कर फिर से बातचीत की मेज पर लौटना होगा। भले ही यह मुश्किल हो, लेकिन युद्ध से बचने का रास्ता इसी में है। दोनों पक्षों के राष्ट्रीय हित शांति और समझौते में ही हैं—परमाणु खतरे को कम करना, आर्थिक प्रतिबंधों से राहत, और क्षेत्र में स्थिरता। 

वैश्विक संदेश: सच बोलने का समय यह लेख एक बड़े संदेश के साथ आता है—मित्र राष्ट्रों को चुप नहीं रहना चाहिए। अमेरिका के सहयोगी, खासकर खाड़ी देश और यूरोपीय साझेदार, अब खुलकर बोलें। उन्हें कहना होगा कि यह जंग अमेरिका के लिए फायदेमंद नहीं है। यह इज़राइल के एजेंडे में फंसकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति खोने जैसा है।

 बद्र अल-बुसैदी का लेख सिर्फ राजनयिक भाषा नहीं है—यह एक चेतावनी है, एक पुकार है, और एक उम्मीद भी। अगर दुनिया अब नहीं जागी, तो यह जंग और विस्तारित हो सकती है, जिसमें और देश खिंच सकते हैं। लेकिन अगर सच बोला गया, अगर मध्यस्थता फिर से शुरू हुई, तो शांति अभी भी संभव है। 

यह समय है कि वैश्विक समुदाय इस "अवैध जंग" को रोकने के लिए एकजुट हो। ओमान जैसे देश, जो संवाद में विश्वास रखते हैं, आगे आ रहे हैं। अब बारी बाकी दुनिया की है—क्या हम शांति चुनेंगे, या विनाश की इस राह पर चलते रहेंगे? 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World March 19,2026