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Thursday, 19 March 2026

यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड पर आग: लंबी तैनाती और युद्ध की थकान ने अमेरिकी नौसेना को झकझोर दिया

यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड पर आग: लंबी तैनाती और युद्ध की थकान ने अमेरिकी नौसेना को झकझोर दिया
-Friday 🌎 World 20 March 2026
मार्च 2026 में अमेरिका-ईरान संघर्ष अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिकी और इज़राइली बलों ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए हैं, लेकिन इस जंग का सबसे बड़ा असर अब अमेरिकी सेना के अंदर दिखाई दे रहा है। दुनिया के सबसे बड़े और सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (CVN-78) पर 12 मार्च को लगी आग ने न केवल जहाज को क्षति पहुँचाई, बल्कि पूरे अमेरिकी नौसेना और जनता में युद्ध-विरोधी भावनाओं को और तेज कर दिया है। 

आग की घटना: क्या हुआ था?

 12 मार्च 2026 को रेड सी में तैनात यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड के मुख्य लॉन्ड्री एरिया में आग लग गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह आग युद्ध से संबंधित नहीं थी। शुरुआत में इसे एक ड्रायर वेंट से शुरू बताया गया, जो तेजी से फैल गई। आग को पूरी तरह बुझाने में 30 घंटे से अधिक समय लगा।

 इस घटना के परिणाम गंभीर थे: 

→ तीन नौसैनिक घायल हुए—एक को हवाई मार्ग से इलाज के लिए जहाज से बाहर ले जाया गया, जबकि दो अन्य स्थिर हालत में हैं।

 → लगभग 200 नौसैनिकों को धुएँ से संबंधित चोटें आईं। 

→ जहाज के मुख्य बर्थिंग एरिया को इतनी क्षति पहुँची कि 600 से अधिक नौसैनिकों को अपने बिस्तर खोने पड़े। वे अब फर्श, टेबल या अन्य जगहों पर सो रहे हैं।

 → आग बुझाने के लिए इस्तेमाल पानी और फोम से जहाज के कई हिस्सों में पानी भर गया, जिससे सफाई और मरम्मत का काम लंबा खिंच रहा है।

 नौसेना ने स्पष्ट किया कि जहाज का प्रोपल्शन प्लांट सुरक्षित है और यह अभी भी ऑपरेशनल है। लेकिन आग के बाद फोर्ड को रेड सी से हटाकर ग्रीस के क्रीट द्वीप पर अमेरिकी नौसेना बेस सौदा बे में अस्थायी मरम्मत के लिए भेजा जा रहा है। यह कदम युद्ध के बीच अमेरिकी नौसेना की चुनौतियों को उजागर करता है। 

लंबी तैनाती: नौसैनिकों की थकान और मनोबल पर असर

यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड जून 2025 से तैनात है—यानी लगभग 9-10 महीने हो चुके हैं। पहले यह कैरिबियन में था, फिर वेनेजुएला संकट के बाद मिडिल ईस्ट भेजा गया। फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ ऑपरेशन शुरू होने के बाद इसकी तैनाती और बढ़ा दी गई। नौसैनिकों के परिवारों और पूर्व सैनिकों से मिली जानकारी के अनुसार: 

→ बार-बार एक्सटेंशन से थकान चरम पर है। 

→ परिवार से दूर रहना, लगातार युद्ध अभियान, और जहाज पर प्लंबिंग जैसी पुरानी समस्याएँ (जो पहले से रिपोर्ट की जा रही थीं) मनोबल को गिरा रही हैं। 

→ एक नौसैनिक के माता-पिता ने कहा, “वे थक चुके हैं। आग ने मनोबल को और गिरा दिया है।”

 यह थकान सिर्फ फोर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिकी सेना में लंबे समय से युद्ध-विरोधी भावनाएँ बढ़ रही हैं। कई सर्वे दिखाते हैं कि आम अमेरिकी नागरिक ईरान के साथ पूर्ण युद्ध का समर्थन बहुत कम कर रहे हैं—कई पोल में यह 20-30% से नीचे है। युवा पीढ़ी, खासकर मिलेनियल्स और जेन-जेड, सोशल मीडिया पर #NoWarWithIran और #BringOurTroopsHome जैसे अभियानों में सक्रिय हैं। 

अमेरिकी जनता और सेना: युद्ध से दूरी बढ़ती जा रही है

 यह आग की घटना अमेरिका में व्यापक असंतोष का प्रतीक बन गई है। रिटायर्ड जनरल्स और पूर्व सैनिक खुले तौर पर कह रहे हैं कि यह जंग अमेरिकी हितों के खिलाफ है। ओमान के विदेश मंत्री सय्यिद बद्र अल-बुसैदी ने भी चेतावनी दी है कि यह “अमेरिका की जंग नहीं है”—यह इज़राइल के एजेंडे में फंसकर अमेरिका अपनी विदेश नीति पर नियंत्रण खो रहा है। 

परिणाम पहले से दिख रहे हैं: 

→ तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर। 

→ वैश्विक मुद्रास्फीति का खतरा। 

→ सहयोगी देश (ब्रिटेन, फ्रांस, जापान आदि) अमेरिकी अनुरोध पर जहाज भेजने से इनकार कर रहे हैं। 

→ NATO में दरार, यूरोपीय देश डिप्लोमेसी पर जोर दे रहे हैं। 

स्वेज संकट (1956) की याद ताजा हो रही है—जब ब्रिटेन ने सैन्य जीत हासिल की, लेकिन राजनीतिक-आर्थिक हार से सुपरपावर का दर्जा खो दिया। आज अमेरिका उसी राह पर है। सैन्य ताकत से शुरुआत हुई, लेकिन असल में ईरान क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत हो रहा है, राष्ट्रवाद बढ़ रहा है, और अमेरिका अलग-थलग पड़ता जा रहा है। 

शांति की आवश्यकता: अब समय आ गया है

 यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड पर आग ने साबित कर दिया कि कोई भी युद्ध बिना घरेलू समर्थन के नहीं चल सकता। सेना थक चुकी है, जनता नहीं चाहती, और सहयोगी चुप हैं। 

अमेरिका को अपने सहयोगियों की सुननी होगी—युद्ध रोकना होगा, बातचीत की मेज पर लौटना होगा। ओमान जैसे देश पहले से मध्यस्थता की पेशकश कर रहे हैं। अगर अब नहीं जागे, तो यह जंग और विस्तारित हो सकती है—और अमेरिका स्वेज की तरह अपनी वैश्विक छवि और आर्थिक स्थिरता खो सकता है। 

शांति चुनना अब केवल विकल्प नहीं—यह आवश्यकता है। वरना यह आग सिर्फ जहाज तक नहीं, पूरे क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था तक फैल जाएगी। 


Sajjadali Nayani ✍ 
Friday 🌎 World 20 March 2026