-Friday 🌎 World 20 March 2026
"पड़ोसी बदल नहीं सकते, लेकिन दोस्ती बदल सकती है"—यह गुजराती कहावत आज अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बिल्कुल फिट बैठती है। मार्च 2026 में मध्य पूर्व का युद्ध (अमेरिका-इज़राइल बनाम ईरान) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। नतीजा? वैश्विक तेल संकट, कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर, एशिया में ईंधन राशनिंग, और कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दामों में 20-30% का उछाल।
इस संकट में पाकिस्तान सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है, और ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है। ठीक इसी समय रूस ने एक बड़ा ऑफर दिया है—पाकिस्तान को डिस्काउंट पर क्रूड ऑयल सप्लाई करने की तैयारियां। रूस के पाकिस्तान में राजदूत अल्बर्ट खोरेव ने 17 मार्च 2026 को इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा: "मॉस्को पाकिस्तान को डिस्काउंट रेट पर तेल सप्लाई करने को तैयार है। अगर इस्लामाबाद औपचारिक रूप से संपर्क करे, तो हम अनलिमिटेड और सस्ता तेल दे सकते हैं।"
यह ऑफर कोई मामूली बात नहीं है। रूस पहले से ही भारत को भारी डिस्काउंट पर तेल बेच रहा है—यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत रूसी क्रूड का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। अब पाकिस्तान को भी यही रास्ता दिखाया जा रहा है। राजदूत खोरेव ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। लेकिन प्रगति इस्लामाबाद की पहल पर निर्भर है—अभी तक कोई औपचारिक रिक्वेस्ट नहीं आई है।
होर्मुज बंद होने का असर: पाकिस्तान पर सबसे गहरा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का प्रभावी बंद होना दुनिया के लिए सबसे बड़ा ऊर्जा झटका है। 1970 के दशक के तेल संकट के बाद यह सबसे बड़ा डिसरप्शन माना जा रहा है। पाकिस्तान की 70-80% तेल आयात खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई, कतर) से होता है, और ज्यादातर जहाज इसी स्ट्रेट से गुजरते हैं। अब जहाजों पर हमले, माइन की रिपोर्ट्स, और बीमा कंपनियों की हाई रिस्क रेटिंग से सप्लाई चेन टूट गई है।
पाकिस्तान में:
→ पेट्रोल-डीजल के दामों में 20% से ज्यादा का उछाल।
→ पावर सेक्टर में लोडशेडिंग बढ़ने की आशंका।
→ इकोनॉमिक प्रेशर: मुद्रास्फीति, करेंसी डेप्रिशिएशन, और आम आदमी पर बोझ।
पाकिस्तान ने सऊदी अरब से रेड सी रूट (यानबू पोर्ट) के जरिए तेल मांगने की कोशिश की है, लेकिन क्षमता सीमित है। ऐसे में रूस का ऑफर एक बड़ा विकल्प बनकर उभरा है। रूसी क्रूड (उराल्स ग्रेड) पहले से ही एशिया में डिस्काउंट पर बिक रहा है—अब पाकिस्तान को भी यही फायदा मिल सकता है।
रूस की स्ट्रैटेजी: दो पंछी एक तीर से
यह ऑफर सिर्फ आर्थिक मदद नहीं—यह जियो-पॉलिटिकल मास्टरस्ट्रोक है।
1. अमेरिका विरोधी नैरेटिव रूस का कहना है कि होर्मुज संकट अमेरिका-इज़राइल के ईरान पर हमलों का नतीजा है। सस्ता तेल देकर रूस पाकिस्तान को अमेरिकी प्रभाव से दूर खींच सकता है। पाकिस्तान पहले से ही अमेरिका के साथ तनाव में है—IMF लोन, मिलिट्री एड कट्स आदि। रूसी तेल से पाकिस्तान को राहत मिलेगी और मॉस्को का प्रभाव बढ़ेगा।
2. अपना ऑयल बिजनेस बूस्ट: होर्मुज बंद होने से ग्लोबल ऑयल प्राइस बढ़े हैं। रूस को पहले डिस्काउंट देना पड़ता था (चीन, भारत को), लेकिन अब कीमतें ऊपर हैं तो रूस की कमाई बढ़ रही है—एक्सपर्ट्स के अनुसार रोजाना $150 मिलियन एक्स्ट्रा रेवेन्यू। पाकिस्तान को डिस्काउंट पर भी बेचकर रूस वॉल्यूम बढ़ा सकता है और मार्केट शेयर हासिल कर सकता है।
3. भारत-पाकिस्तान बैलेंस: रूस भारत को पहले से सस्ता तेल दे रहा है। अब पाकिस्तान को भी ऑफर देकर रूस दोनों पड़ोसियों के साथ बैलेंस बनाए रखना चाहता है। यह "पड़ोसी बदल नहीं सकते, लेकिन दोस्ती बदल सकती है" वाली कहावत को साबित करता है—रूस दोनों के साथ दोस्ती बढ़ा रहा है।
पाकिस्तान के लिए फैसला मुश्किल, लेकिन जरूरी पाकिस्तान के सामने दो रास्ते:
→ अमेरिका/सऊदी अरब पर निर्भर रहें—महंगा तेल, राजनीतिक प्रेशर।
→ रूस से डील करें—सस्ता तेल, लेकिन अमेरिकी सैंक्शंस का खतरा (रूसी ऑयल पर पहले से सैंक्शंस हैं)।
अभी तक कोई फॉर्मल रिक्वेस्ट नहीं हुई है, लेकिन पाकिस्तान की इकोनॉमी इतनी दबाव में है कि यह ऑफर ठुकराना मुश्किल होगा। अगर डील हुई, तो यह दक्षिण एशिया में रूस की एंट्री का नया चैप्टर होगा—और भारत के लिए भी एक नया बैलेंसिंग एक्ट।
वैश्विक संदेश: ऊर्जा अब हथियार है यह संकट साबित कर रहा है कि ऊर्जा सिर्फ कमोडिटी नहीं—यह जियो-पॉलिटिक्स का सबसे बड़ा हथियार है। रूस जैसे देश संकट में भी फायदा उठा रहे हैं। अमेरिका-इज़राइल की जंग से पैदा हुए संकट में रूस पाकिस्तान को हाथ बढ़ा रहा है।
पड़ोसी बदल नहीं सकते—लेकिन दोस्ती जरूर बदल सकती है। होर्मुज बंद है, लेकिन रूस के लिए नए दरवाजे खुल रहे हैं। पाकिस्तान अब फैसला करेगा—पुराने दोस्तों के साथ महंगा तेल, या नई दोस्ती के साथ सस्ती राहत?
यह समय है कि दुनिया ऊर्जा सुरक्षा को नए सिरे से देखे। युद्ध सिर्फ मिसाइलों से नहीं—तेल की कीमतों और सप्लाई चेन से भी लड़े जाते हैं। रूस का यह ऑफर उसी की मिसाल है—संकट में भी अवसर तलाशना।
Sajjadali Nayani ✍
Friday 🌎 World 20 March 2026