-Friday World March 17,2026
"यूक्रेन-रूस युद्ध के भाड़े के सैनिक भारत में घुसे! NIA की बड़ी कार्रवाई: 7 विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी, मिजोरम से म्यांमार बॉर्डर क्रॉस कर आतंकी ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई का बड़ा नेटवर्क उजागर"
देश की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बार फिर अपनी सतर्कता और साहस से साबित किया है कि भारत की आंतरिक सुरक्षा को कोई चुनौती नहीं दे सकता। मार्च 2026 में NIA ने एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें 6 यूक्रेनियाई और 1 अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। ये सभी लोग वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन उनका मकसद कुछ और ही था – भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देना, खासकर पूर्वोत्तर के संवेदनशील इलाकों में अशांति फैलाना।
गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम
गिरफ्तारी दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट पर हुई। कोलकाता एयरपोर्ट से अमेरिकी नागरिक को पकड़ा गया, जबकि दिल्ली और लखनऊ से तीन-तीन यूक्रेनियाई नागरिकों को हिरासत में लिया गया। इमीग्रेशन ब्यूरो की सतर्कता से ये लोग फ्लाइट पकड़ने से पहले ही पकड़े गए। NIA ने इन्हें UAPA की धारा 18 (आतंकी कृत्यों की साजिश) सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार किया। पटियाला हाउस कोर्ट, दिल्ली में विशेष NIA अदालत ने सभी 7 आरोपियों को 11 दिनों की NIA हिरासत में भेज दिया है, जो 27 मार्च तक चलेगी। जांच एजेंसी को इनसे गहन पूछताछ करने और साजिश के पूरे नेटवर्क को उजागर करने का मौका मिला है।
मिजोरम से म्यांमार तक का खतरनाक रास्ता** जांच में सामने आया है कि ये सभी आरोपी वैध वीजा पर भारत में दाखिल हुए, लेकिन मिजोरम जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र (Restricted Area) में बिना आवश्यक Restricted Area Permit (RAP) के घुस गए। मिजोरम भारत-म्यांमार बॉर्डर पर स्थित है, जहां से अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश करना आसान हो जाता है। आरोपियों ने इसी रास्ते का इस्तेमाल किया और म्यांमार में जाकर उन जातीय सशस्त्र समूहों (ethnic armed groups) से संपर्क किया, जो भारत विरोधी हैं और पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय आतंकी संगठनों को समर्थन देते हैं।
NIA के अनुसार, ये लोग म्यांमार में हथियारों की ट्रेनिंग ले रहे थे और दूसरों को ट्रेनिंग दे रहे थे। इनमें ड्रोन ऑपरेशन, हथियार हैंडलिंग और युद्धक कौशल शामिल थे। खास बात ये है कि कई आरोपी पहले रूस-यूक्रेन युद्ध में शामिल रह चुके हैं। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने विधानसभा में पहले ही चेतावनी दी थी कि अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के नागरिक मिजोरम के रास्ते म्यांमार जा रहे हैं और वहां विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। उनकी ये बात अब हकीकत साबित हो गई है।
ड्रोन सप्लाई का बड़ा खेल
सबसे चौंकाने वाला खुलासा ड्रोन से जुड़ा है। NIA ने पाया कि आरोपी यूरोप से बड़ी मात्रा में ड्रोन मंगवा रहे थे और इन्हें भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचा रहे थे। ये ड्रोन उन जातीय सशस्त्र समूहों को दिए जा रहे थे, जो भारत के खिलाफ हिंसा में शामिल हैं। ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, हमले और हथियार सप्लाई के लिए किया जा सकता है। ये एक क्रॉस-बॉर्डर ड्रोन थ्रेट का स्पष्ट संकेत है, जो भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। जांच एजेंसी अब ये पता लगा रही है कि ये ड्रोन किसके फंडिंग से आए, कौन-कौन से समूह शामिल हैं और क्या कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क इसके पीछे है।
क्यों है ये साजिश इतनी खतरनाक?
पूर्वोत्तर भारत पहले से ही संवेदनशील है। मणिपुर, मिजोरम, असम जैसे राज्यों में जातीय तनाव और विद्रोही गतिविधियां चल रही हैं। म्यांमार में जारी गृहयुद्ध ने बॉर्डर को और कमजोर कर दिया है। ऐसे में विदेशी नागरिकों का आना और आतंकी ट्रेनिंग देना सीधे भारत की संप्रभुता पर हमला है। NIA का मानना है कि ये लोग भारतीय insurgent groups को हथियार, तकनीक और ट्रेनिंग सप्लाई कर रहे थे। अगर ये साजिश कामयाब हो जाती, तो पूर्वोत्तर में बड़े पैमाने पर अशांति फैल सकती थी।
मिजोरम CM की पुरानी चेतावनी अब सच्चाई बनी
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने 2025 में ही विधानसभा में खुलासा किया था कि विदेशी नागरिक (खासकर अमेरिका और ब्रिटेन के) मिजोरम के रास्ते म्यांमार जा रहे हैं और वहां विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग रूस-यूक्रेन युद्ध में शामिल रह चुके हैं। अब NIA की कार्रवाई से उनकी बात सही साबित हुई है। ये सवाल भी उठता है कि बॉर्डर सिक्योरिटी में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार को पहले से जानकारी थी?
NIA की सफलता और आगे की जांच** NIA की ये कार्रवाई भारत की काउंटर-टेररिज्म क्षमता का प्रमाण है। एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले नेटवर्क को पहचाना और उसे समय रहते रोक दिया।अब जांच में ये पता लगाया जा रहा है –
- ड्रोन की फंडिंग और सप्लाई चेन कौन संभाल रहा था?
- क्या कोई विदेशी खुफिया एजेंसी या NGO इसमें शामिल है?
- म्यांमार के कौन-कौन से ग्रुप भारत विरोधी गतिविधियों में लगे हैं?
- क्या पूर्वोत्तर के किसी आतंकी संगठन से डायरेक्ट लिंक है?
देश के लिए सबक ये घटना बताती है कि आतंकवाद अब सीमाओं में नहीं बंधा। ड्रोन, साइबर और विदेशी mercenaries के जरिए खतरा बढ़ गया है। भारत को बॉर्डर मैनेजमेंट, खुफिया जानकारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करना होगा। NIA जैसे एजेंसियां दिन-रात काम कर रही हैं, लेकिन हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि संदिग्ध गतिविधि देखकर तुरंत सूचित करें। NIA की इस सफलता से एक बात साफ है – भारत अब किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगा। चाहे वो पड़ोसी देश से आए या दूर के विदेशी नागरिकों से। सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 17,2026