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Thursday, 24 September 2026

दिल्ली में सियासी भूचाल - EC दफ्तर छावनी में तब्दील, अंदर से ही उठे 14 सवाल तो बाहर लगे 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारे

दिल्ली में सियासी भूचाल - EC दफ्तर छावनी में तब्दील, अंदर से ही उठे 14 सवाल तो बाहर लगे 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारे
- Friday World September 25,2026 
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सियासी हलचल तेज हो गई है। एक तरफ चुनाव आयोग (ECI) के दफ्तर को छावनी में बदल दिया गया है, बैरिकेडिंग, दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री तैनात है, तो दूसरी तरफ सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन की आहट है। नारा गूंज रहा है - वोट चोर, गद्दी छोड़!

इस पूरे बवाल की वजह बनी है The Indian Express की एक एक्सप्लोसिव खबर।

 The Indian Express ने क्या खोला?

अखबार की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयोग के दो Election Commissioners - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने खुद आयोग के फैसलों पर रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई है। 

रिपोर्ट कहती है कि Special Intensive Revision (SIR) के नाम पर हो रही वोटर लिस्ट की सफाई के कई फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए। जून 2025 में बिहार से शुरू हुई इस प्रक्रिया में अब तक 30 राज्यों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए जा चुके हैं। 5c45

आपत्तियां किस बात पर थीं?
- नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन (Form 6 में बदलाव)
- वोटर्स के नाम हटाना और जोड़ना
- वोटर लिस्ट के IT सिस्टम और डेटा की कस्टडी को दिल्ली में सेंट्रलाइज करना
- कई फैसले तो एक ही दिन में 4-4 बार आपत्ति के बावजूद जारी कर दिए गए, जिसे एक कमिश्नर ने "unauthorized and illegal" तक कहा 

बात इतनी बढ़ गई कि दोनों कमिश्नरों ने कैबिनेट सेक्रेटरी को अलग से चिट्ठी भी लिखी।

 चुनाव आयोग का जवाब

खबर आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि "operational queries या inputs उठाना स्टैंडर्ड एडमिनिस्ट्रेटिव प्रैक्टिस है" और सभी फैसले सर्वसम्मति से और पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं। आयोग ने कहा कि अलग-अलग राय होना किसी भी संस्था में विचार-विमर्श का हिस्सा है। 

 तो सड़कों पर पुलिस क्यों?

विपक्ष और युवा संगठनों का आरोप है कि जब रक्षक ही सवाल उठाने लगें, तो समझिए लोकतंत्र खतरे में है। यही वजह है कि दिल्ली में "वोट बचाओ" आंदोलन की आहट है। पुलिस ने एहतियातन EC दफ्तर के बाहर किले जैसी सुरक्षा कर दी है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है - ये लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, आपके वोट के अधिकार की है। अगर 13 करोड़ नाम कट सकते हैं, तो कल आपका नाम भी कट सकता है। दिल्ली में सबसे ज्यादा 32.8% नाम हटने का आंकड़ा इसी डर को बढ़ाता है।

 जागो, जुड़ो, आवाज उठाओ

वोट ही लोकतंत्र की आत्मा है। अगर वोटर लिस्ट से ही नाम गायब हो जाएगा तो लोकतंत्र कैसे बचेगा? यह सवाल सिर्फ चुनाव आयोग का नहीं, हर मतदाता का है।

वोट की चोरी बर्दाश्त नहीं होगी - यही इस पूरे आंदोलन का सार है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 25,2026 

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