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Friday, 25 September 2026

सिस्टम में लीक, सत्ता में दरार? - ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा बना मोदी सरकार के लिए 'करो या मरो' का सवाल

सिस्टम में लीक, सत्ता में दरार? - ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा बना मोदी सरकार के लिए 'करो या मरो' का सवाल
-Friday World September 25,2026 
नई दिल्ली: दिल्ली के सियासी गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा है - "अंदर से लीक हुआ सिस्टम"। खबर है कि चुनाव आयोग के अंदर की कलह अब सिर्फ आयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसकी आंच सीधे केंद्र सरकार तक पहुंच रही है। सवाल उठ रहा है - क्या मोदी सरकार टूटने की कगार पर है?

पिछले हफ्ते The Indian Express की रिपोर्ट ने जब यह खुलासा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार अपने ही फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई, तो विपक्ष को बड़ा मुद्दा मिल गया। विपक्ष का आरोप है कि जब रक्षक ही सवाल उठा रहे हैं, तो चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा कैसे हो?

दो धारी तलवार पर सरकार?

राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, सरकार इस वक्त एक अजीबोगरीब दोहरे संकट में फंस गई है, जिसे 'Catch-22' कहा जा रहा है:

 1. अगर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होता तो: विपक्ष इसे लोकतंत्र की हत्या बताकर सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन तेज करेगा। 'वोट चोर, गद्दी छोड़' का नारा पहले ही दिल्ली को छावनी में बदल चुका है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी भारत के लोकतंत्र पर सवाल उठने लगे हैं। इससे सरकार की छवि को नुकसान और अंत निकट होने की चर्चा तेज होगी।

 2. अगर इस्तीफा हो जाता है तो: यह सरकार के लिए और भी बड़ा संकट बन सकता है। विपक्ष इसे अपनी जीत बताएगा और इस्तीफे को अपनी मांगों के दबाव में लिया गया फैसला साबित करेगा। इससे सत्ताधारी गठबंधन के अंदर ही असंतुष्ट सांसदों और विधायकों को बगावत का मौका मिल सकता है। सूत्रों का कहना है कि कई सांसद पहले से ही असहज हैं और ऐसी स्थिति में सरकार में रहते हुए भी दूसरी पार्टी के सांसदों की तरह बगावती तेवर दिखा सकते हैं।

यानी, इधर कुआं उधर खाई वाली स्थिति।

 क्या वाकई टूट रही है सरकार?

हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि केंद्र सरकार के पास लोकसभा में अभी भी पूर्ण बहुमत है। सरकार का टूटना सिर्फ एक चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से तय नहीं होता। लेकिन हां, यह नैतिक और राजनीतिक दबाव जरूर बनाता है।

विपक्ष इस मुद्दे को SIR (Special Intensive Revision) में 13 करोड़ नाम कटने और 14 बार आपत्ति वाले लीक से जोड़कर बड़ा बनाने की कोशिश में है। उनका तर्क है कि जब सिस्टम ही अंदर से लीक हो रहा है, तो सरकार कैसे बचेगी?

अगले 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। चुनाव आयोग का अगला आधिकारिक बयान और विपक्ष की रणनीति तय करेगी कि यह संकट टलता है या और गहराता है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 25,2026 

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