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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Thursday, 17 September 2026

मिडिल ईस्ट में बड़ा खेल - दुश्मन का दुश्मन दोस्त! हूतियों के डर से सऊदी-यूएई ने थामा इजरायल का हाथ, UAE में तैनात हुआ आयरन डोम

मिडिल ईस्ट में बड़ा खेल - दुश्मन का दुश्मन दोस्त! हूतियों के डर से सऊदी-यूएई ने थामा इजरायल का हाथ, UAE में तैनात हुआ आयरन डोम
-Friday World September 17,2026 
मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति अब किताबों वाले नियमों से नहीं चल रही। यहाँ दुश्मनी और दोस्ती दोनों की परिभाषा रातों-रात बदल रही है। जो खाड़ी देश कल तक इजरायल को मान्यता तक देने को तैयार नहीं थे, आज वही इजरायल उनके लिए ढाल बना हुआ है। वजह है - ईरान युद्ध और हूतियों का खौफ।

खाड़ी में डर का माहौल कैसे बना?

पिछले कुछ महीनों में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच सीधा टकराव हुआ। इसमें खाड़ी देश पीस गए। ईरान ने गुस्से में UAE, कतर और बहरीन जैसे देशों पर भी मिसाइल और ड्रोन बरसाए, क्योंकि वहाँ अमेरिकी बेस हैं।

उसी वक्त यमन में दूसरा मोर्चा खुल गया। जुलाई 2026 में सना एयरपोर्ट पर सऊदी समर्थित हमले के बाद 2022 वाला सीजफायर टूट गया। हूतियों ने साफ कह दिया - एयरपोर्ट के बदले एयरपोर्ट। उन्होंने सऊदी के आभा, जेद्दा और रियाद के पास तक ड्रोन भेजने शुरू कर दिए। तेल की पाइपलाइन और रिफाइनरी पर खतरा मंडराने लगा।

रियाद ने पहले अपने पुराने भरोसेमंद दोस्तों को फोन लगाया - पाकिस्तान और तुर्की को। पाकिस्तान की 13 हजार से ज्यादा फौज रियाद में बैठी है, पर इस्लामाबाद ने यमन में जमीनी ऑपरेशन से साफ इनकार कर दिया। तुर्की ने भी कूटनीतिक बयान से ज्यादा कुछ नहीं किया। सऊदी को समझ आ गया कि महंगे हथियार खरीदने से सुरक्षा नहीं मिलती, भरोसेमंद पार्टनर चाहिए।

UAE बना टर्निंग पॉइंट

सऊदी के इजरायल पर भरोसा करने की सबसे बड़ी वजह UAE है। जब ईरान युद्ध चरम पर था और तेहरान अबू धाबी पर लगातार मिसाइलें दाग रहा था, तब अमेरिका के सिस्टम जवाब देने में देर कर रहे थे। उस वक्त इजरायल सामने आया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल ने अपना सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टम - Barak-8 और Iron Dome की बैटरी - UAE में तैनात कर दी। इजरायली रडार ने ईरानी ड्रोन को UAE की सीमा में घुसने से पहले ही ट्रैक किया। अबू धाबी बच गया।

UAE के क्राउन प्रिंस ने उसी दिन कहा था कि सुरक्षा धर्म नहीं देखती। यही घटना रियाद के लिए आई-ओपनर थी। अगर इजरायल UAE को बचा सकता है, तो सऊदी को भी बचा सकता है।

अब्राहम अकॉर्ड 2.0 की आहट

अमेरिका यही तो चाहता था। बाइडेन के बाद अब नई अमेरिकी स्ट्रेटेजी साफ है - खाड़ी देशों को एक सुरक्षा छतरी के नीचे लाओ, जिसका सेंटर इजरायल हो। इसे अमेरिका के नेतृत्व वाला MEAD - Middle East Air Defense Alliance कहा जा रहा है।

पहले इस गठबंधन में सिर्फ इजरायल, UAE और बहरीन थे। अब पहली बार सऊदी अरब भी इसमें शामिल होने की इच्छा दिखा रहा है। सऊदी विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने संकेत दिया है कि वे हूती मिसाइलों को रोकने के लिए इजरायली तकनीक लेने से परहेज नहीं करेंगे।

मतलब साफ है - अब रियाद तेल अवीव से मदद मांग रहा है। जो सऊदी कल तक फिलिस्तीन के नाम पर इजरायल से दूरी बनाता था, आज अपनी राजधानी बचाने के लिए उसी इजरायल का रडार मांग रहा है।

मुस्लिम उम्मत का क्या होगा?

यहाँ सबसे बड़ा सवाल उठता है। पाकिस्तान और तुर्की के इनकार के बाद सऊदी का इजरायल की तरफ जाना मुस्लिम दुनिया में एक नई बहस छेड़ेगा। क्या ईरान के डर से सुन्नी अरब देश इजरायल के साथ खड़े हो जाएंगे? क्या अब्राहम अकॉर्ड सिर्फ एक कागज नहीं, बल्कि एक मिलिट्री पैक्ट बन जाएगा?

जवाब हाँ में ज्यादा दिख रहा है। क्योंकि खाड़ी देशों को समझ आ गया है कि ईरान युद्ध अब प्रॉक्सी वॉर नहीं रहा, सीधा वॉर है। और इस सीधे वॉर में आयरन डोम, डेविड स्लिंग और एरो-3 जैसे सिस्टम ही बचा सकते हैं, जो सिर्फ इजरायल के पास हैं।

नया मिडिल ईस्ट

मिडिल ईस्ट अब पुराना मिडिल ईस्ट नहीं रहा। यहाँ अब लड़ाई शिया-सुन्नी या अरब-इजरायल की नहीं, बल्कि सर्वाइवल की है। हूतियों के सस्ते ड्रोन ने अरबों डॉलर के महलों को असुरक्षित कर दिया है। और जब महल असुरक्षित होते हैं, तो राजा दुश्मन से भी हाथ मिला लेता है।

सऊदी का इजरायल की तरफ झुकाव इसी का नतीजा है। UAE ने रास्ता दिखाया, सऊदी अब उस पर चल रहा है। आने वाले महीनों में अगर रियाद और तेल अवीव के बीच एयर डिफेंस डील की खबर आए, तो चौंकिएगा मत। यही नया नॉर्मल है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 17,2026 

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