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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Thursday, 17 September 2026

सऊदी ने ले लिया पूरा अमलतास - चार साल पुराना सीजफायर टूटा, अब हूतियों के सामने फौजी टूरिज्म नहीं चलेगा!

सऊदी ने ले लिया पूरा अमलतास - चार साल पुराना सीजफायर टूटा, अब हूतियों के सामने फौजी टूरिज्म नहीं चलेगा!
-Friday World September 17,2026 
पंजाब में कहावत है - आ बैल मुझे मार। मतलब खुद ही मुसीबत को न्योता देना। आज की नई कहावत है - अमलतास लेना। अमलतास एक फल है, लंबी काली फलियों वाला। आयुर्वेद में इसके हजार फायदे हैं, पर खाने में नहीं, लगाने में। जो गलती से भी पूरा अमलतास ले ले, वो हफ्तों तक याद रखता है।
 तस्वीर में देखो, यही है वो 100 ग्राम 180 रुपये वाला प्रसिद्ध फल। सऊदी अरब ने इस बार यही काम किया है, और वो भी आधा नहीं, पूरा।

जियारत को जा रहे थे, वजह कोई नहीं थी

कहानी शुरू होती है तेहरान से। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के इंतकाल के बाद उनका जनाजा सिर्फ ईरान का जनाजा नहीं था। शिया दुनिया के लिए वो एक मजहबी रहनुमा थे। इराक, लेबनान, बहरीन, पाकिस्तान, यमन - हर जगह उनके मानने वाले। उनका जनाजा 6 दिन चला, तेहरान से कोम, फिर नजफ और कर्बला तक।

यमन के हूती डेलिगेशन को भी बुलाया गया था। वो अपने लीडर की जियारत समझकर गए। ईरान की Mahan Air की फ्लाइट से। इसमें गलत क्या था? जाना तो बनता ही था।

पर वापसी पर पंगा हो गया।

13 जुलाई का वो रनवे अटैक

जब वो फ्लाइट सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड करने वाली थी, तभी यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने एयरपोर्ट के रनवे पर एयरस्ट्राइक कर दी। मकसद साफ था - ईरानी जहाज को उतरने से रोकना। यमनी डिफेंस मिनिस्टर ताहिर अल-अकीली ने खुद वीडियो जारी करके कहा कि ईरानी घुसपैठ बर्दाश्त नहीं होगी।

जहाज क्रैश नहीं हुआ, पायलट ने समझदारी दिखाई और उसे होदैदा एयरपोर्ट पर उतार दिया। लेकिन मैसेज चला गया।

हूतियों का कहना है ये पहली बार नहीं था। 3 जुलाई को जब वो जा रहे थे, तब भी सऊदी जेट्स ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी।

तो सीजफायर किसने तोड़ा?

यही सबसे बड़ा सवाल है। 2022 से हूती और सऊदी के बीच UN की मध्यस्थता से सीजफायर चल रहा था। चार साल से बंदूकें खामोश थीं। गाजा वॉर के दौरान हूती इजरायल और रेड सी में बिजी थे, सऊदी बॉर्डर शांत था।

इस एयरपोर्ट हमले ने उस शांति को खत्म कर दिया। उसके दो दिन बाद ही हूतियों ने सऊदी के आभा एयरपोर्ट पर ड्रोन और मिसाइल मार दी। फिर हूती लीडर अब्दुल मलिक अल-हूती ने टीवी पर आकर खुली धमकी दी - "अब समीकरण साफ है, एयरपोर्ट के बदले एयरपोर्ट, पोर्ट के बदले पोर्ट।" उन्होंने सऊदी की तेल फैसिलिटी तक को टारगेट करने की बात कह दी।

तो शुरुआत किसने की? रिकॉर्ड पर सऊदी कैंप ने की।

फौजी टूरिज्म vs असली लड़ाके

यहाँ से असली फर्क शुरू होता है। सऊदी सेना की पूरी दुनिया में एक इमेज है - महंगे अमेरिकी हथियार, महंगे जेट्स, पर ट्रेनिंग के नाम पर सिर्फ फौजी टूरिज्म। अमेरिका में जाकर फोटो खिंचवाना, एक्सरसाइज करना, पर असली जमीनी जंग का जीरो तजुर्बा।

सामने हूती हैं। 2015 से जंग लड़ रहे हैं। पहाड़ों में, रेगिस्तान में, भूखे-प्यासे। सऊदी गठबंधन, अमेरिका, सब देख चुके हैं। वो लड़ाके हैं, वो भी एक नंबर के।

अब सऊदी ऊपर से बम मार रहा है। सना एयरपोर्ट पर बमबारी कर दी। पर जमीन पर क्या? हूती इस वक्त दो अहम द्वीपों और इलाकों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। उन्हें खाली करवाने के लिए जमीन पर फौज भेजनी पड़ेगी। और ये सऊदियों के बस की बात नहीं। ये बात खुद सऊदी अफसर भी जानते हैं।

पाकिस्तान-तुर्की की चुप्पी और अब्राहम अकॉर्ड का जाल

इस पूरे खेल में सऊदी के दो सबसे करीबी पार्टनर - पाकिस्तान और तुर्की - मुंह में दही जमाए बैठे हैं। पाकिस्तान के 13 हजार से ज्यादा फौजी आज भी रियाद में सऊदी की सुरक्षा में तैनात हैं, पर यमन बॉर्डर पर जाने को कोई तैयार नहीं। तुर्की भी सिर्फ बयान दे रहा है।

सबसे बड़ा डर आगे का है। अगर हूती हमले तेज हुए, तेल प्लांट जले, एयरपोर्ट बंद हुए, तो सऊदी अमेरिका के पास जाएगा। और अमेरिका एक ही शर्त रखेगा - "हम मदद करेंगे, पर अब्राहम अकॉर्ड साइन करो, इजरायल को मान्यता दो।"

तब क्या करेंगे मोमिन? एक तरफ उम्मत की लीडरशिप का दावा, दूसरी तरफ इजरायल से हाथ मिलाने का दबाव। यही वो पूरा अमलतास है जो सऊदी ने लिया है।

 भुगतना तो पड़ेगा

अमलतास का असर तुरंत नहीं दिखता, धीरे-धीरे दिखता है। सऊदी ने जियारत पर जा रहे लोगों को रोककर, बेवजह रनवे उड़ाकर जो किया, उसका असर अब दिखना शुरू होगा। हूती रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कह दिया है कि ये डी-एस्केलेशन फेज खत्म हो गया है।

पंजाबी कहावत अब सही बैठती है - अमलतास पूरा लिया है, आधा भी नहीं। अब भुगतो।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 17,2026 

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