नडियाद में दर्दनाक हादसा: दलित नर्सिंग छात्र जय पाटील की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा – "सॉरी मम्मी, मैं आपको अच्छी जिंदगी देना चाहता था, लेकिन..."
"मैंने किसी को बॉडी-शेम नहीं किया, मुझे फंसाया जा रहा है" –
गुजरात के खेडा जिले के नडियाद शहर में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। 19-21 वर्षीय दलित छात्र जय विजयकुमार पाटिल, जो दिंशा पाटेल कॉलेज ऑफ नर्सिंग में फर्स्ट ईयर का छात्र था, ने 1 फरवरी 2026 को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसने अपनी मां के नाम एक भावुक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उसने गहरा दर्द बयां किया – "सॉरी मम्मी, मैं आपको एक अच्छी जिंदगी देना चाहता था। भगवान ने आपको एक अच्छा बेटा दिया था, लेकिन मैं गलत नहीं हूं। बचपन से एक भी अच्छा दिन नहीं देखा, और अब मैं लोगों को परेशान कर रहा हूं।"
यह नोट पुलिस के पास है और जांच का हिस्सा बन चुका है। जय ने नोट में स्पष्ट लिखा कि उसे महिला प्रोफेसर को बॉडी-शेम करने का झूठा आरोप लगाया जा रहा है, बिना किसी सबूत के उसे फंसाया जा रहा है, और उसका अपमान किया जा रहा है। उसने कहा कि वह गलती करने पर सजा स्वीकार करने वाला व्यक्ति है, लेकिन यहां उसे बेवजह दोषी ठहराया जा रहा है।
कॉलेज में जातिगत भेदभाव का आरोप जय अक्टूबर 2025 में नर्सिंग कोर्स में दाखिला लिया था। परिवार का आरोप है कि जब उसकी स्कॉलरशिप का पहला किस्त कॉलेज के अकाउंट में आया, तो स्टाफ को पता चला कि वह दलित छात्र है। इसके बाद प्रोफेसरों का व्यवहार बदल गया। आरोप है कि प्रोफेसर धारा, प्रकृति, शेरिन (शहरीन), प्रिंसिपल और एक बाहरी व्यक्ति स्मित ने मिलकर उसे परेशान किया।
फरवरी 2026 की शुरुआत में कॉलेज ने जय की मां उर्मिलाबेन को बुलाया और उनके सामने बॉडी-शेमिंग जैसे झूठे आरोप लगाए। जय को माफी नामा लिखने को मजबूर किया गया – तीन बार! उसे अनुशासनहीन बताकर धमकियां दी गईं, कॉलेज से निकालने की बात कही गई। परिवार का कहना है कि यह सब जातिगत भेदभाव का नतीजा था। स्कॉलरशिप आने के बाद ही उत्पीड़न बढ़ा।
पुलिस FIR और देरी पर सवाल आत्महत्या के बाद परिवार ने तुरंत शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन नडियाद रूरल पुलिस ने तीन दिन तक FIR नहीं दर्ज की। दलित समाज के आंदोलनकारियों, अशोकभाई जैसे नेताओं और सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया, जिला पुलिस मुख्यालय पर धरना दिया, तब जाकर 4 फरवरी को FIR दर्ज हुई।
FIR में प्रिंसिपल, तीन महिला प्रोफेसर (धारा, प्रकृति, शेरिन) और स्मित नामक व्यक्ति पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment to suicide) और SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच SC-ST सेल के डीएसपी को सौंपी गई।
पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट में सिर्फ "मैडम" का जिक्र था, नाम नहीं थे, इसलिए जांच के बाद नामजोड़ FIR हुई। SP विजय पटेल ने कहा कि मोबाइल रिकॉर्ड्स, परिवार और स्टाफ के बयान लिए जा रहे हैं। जांच अधिकारी डीवाईएसपी कृणाल राठौड़ ने बताया कि सभी आरोपी पकड़ने की कोशिश जारी है, एक की गिरफ्तारी हुई, बाकी जल्द पकड़े जाएंगे।
दलित समाज में आक्रोश और आगे की मांगें दलित समुदाय में भारी रोष है। आरोप है कि पुलिस ने आरोपी स्टाफ को भागने का मौका दिया। प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज मैनेजमेंट पर दबाव बनाने की कोशिश की। बाद में कॉलेज ने फरार चार कर्मचारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया – जवाब नहीं देने पर सस्पेंड तक की कार्रवाई की बात कही। यह मामला सिर्फ एक छात्र की मौत नहीं, बल्कि शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और कमजोर वर्ग के छात्रों की सुरक्षा का बड़ा सवाल उठाता है। जय जैसे युवा जो गरीबी और मेहनत से पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें अगर संस्थान ही तंग करें, तो समाज कहां जाएगा?
क्या सबक मिलेगा इस दर्द से? जय की मौत ने गुजरात में दलित छात्रों की स्थिति पर फिर से बहस छेड़ दी है। सुसाइड नोट में उसका आखिरी संदेश – "मैं खोटो नहीं हूं" – आज भी गूंज रहा है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है, समाज जागरूक हो रहा है। उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों को सजा मिलेगी, ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
शिक्षा का मंदिर होना चाहिए सुरक्षित जगह, न कि भेदभाव का अड्डा। जय पाटील की याद में हमें जातिवाद के खिलाफ और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए मजबूत कदम उठाने होंगे।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 18th Feb 2026