-Friday World September 17,2026
नई दिल्ली/वाशिंगटन: अमेरिका का ईरान के खिलाफ चलाया गया सबसे महंगा और लंबा हवाई अभियान अब उसी के लिए गले की फांस बन गया है। लीड इंस्पेक्टर जनरल की 9 सितंबर 2026 को प्रकाशित और 15 सितंबर को अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेश की गई पहली आधिकारिक तिमाही रिपोर्ट ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की असली लागत दुनिया के सामने ला दी है।
रिपोर्ट के अनुसार 28 फरवरी से 30 जून 2026 के बीच ही इस अभियान पर लगभग 33.4 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है क्योंकि इसमें बुनियादी ढांचे की मरम्मत और युद्ध के व्यापक आर्थिक प्रभाव को जोड़ा ही नहीं गया है। 74f4
कहाँ खर्च हुआ पैसा?
रिपोर्ट खर्च को तीन हिस्सों में बांटती है:
- 22.3 अरब डॉलर - केवल इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोला-बारूद पर
- 7.4 अरब डॉलर - अतिरिक्त सैन्य संचालन खर्च
- 3.7 अरब डॉलर - नष्ट हुए सैन्य उपकरणों को बदलने की लागत
व्हाइट हाउस ने 24 जून को ही इस खर्च को संभालने के लिए कांग्रेस से 87.6 अरब डॉलर की इमरजेंसी फंडिंग मांगी थी, जिसमें से 67.1 अरब डॉलर सीधे पेंटागन के लिए थे।
जवानों और विमानों का नुकसान
इस चार महीने के अभियान में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक USCENTCOM क्षेत्र में तैनात रहे। उन्होंने लगभग 36,000 लड़ाकू उड़ानें भरीं और ईरान में 13,500 ठिकानों को निशाना बनाया।
मानवीय कीमत भी कम नहीं रही। रिपोर्ट में 14 सैनिकों की मौत की पुष्टि है, जिनमें 7 युद्ध में और 7 गैर-युद्ध कारणों से मारे गए, जबकि 417 सैनिक घायल हुए।
सबसे बड़ा झटका हवाई बेड़े को लगा है। कुल 52 विमान और ड्रोन नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए हैं:
- 4 F-15E Strike Eagle नष्ट, जिनमें 3 अपने ही पक्ष की फायरिंग से
- 1 F-35A क्षतिग्रस्त, 1 E-3 AWACS जमीन पर क्षतिग्रस्त
- 7 KC-135 टैंकर क्षतिग्रस्त या नष्ट
- 1 AH-64 Apache, 1 HH-60W, 1 MH-60 और 4 AH-6 हेलीकॉप्टर खोए गए
- 30 MQ-9 Reaper और 1 MQ-4C Triton ड्रोन खोए गए
खाली होते हथियार भंडार
रिपोर्ट की सबसे चिंताजनक बात है हथियारों की कमी। रिपोर्ट साफ लिखती है, "The munitions expenditure on OEF has resulted in strategic inventory shortfalls and revealed industrial base bottlenecks for munitions resupply." 74f4
सॉलिड रॉकेट मोटर्स, हाई-ग्रेड विस्फोटक और प्रोपेलेंट्स का रणनीतिक भंडार तेजी से घटा है। THAAD इंटरसेप्टर्स का 80% तक स्टॉक लगभग खत्म होने की बात पहले ही सामने आ चुकी है। पेंटागन ने माना है कि हथियार कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने में 3 साल तक लग सकते हैं।
कूटनीति पर भी असर
केवल युद्ध का मैदान ही नहीं, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी दूतावासों और राजनयिक प्रतिष्ठानों को लगभग 18.4 करोड़ डॉलर का भौतिक नुकसान हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट राष्ट्रपति ट्रंप के "असीमित गोला-बारूद" वाले दावे की पोल खोलती है। कांग्रेस अब सवाल पूछ रही है कि बिना विशेष बजट मंजूरी के यह युद्ध कैसे लड़ा गया और इसका बोझ अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ेगा।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान के सुरक्षा तंत्र को तोड़ने का लक्ष्य रखा था, लेकिन फिलहाल यह अमेरिका के अपने रक्षा-औद्योगिक आधार की कमजोरियों को उजागर कर गया है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 17,2026
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